लाहौर – जेनिथ इरफान के पिता का सपना था कि वह पाकिस्तान से निकल पूरी दुनिया की सैर पर मोटरसाइकल से निकलें। उनकी जल्दी मौत के कारण सपने भी मर गए। उनकी बड़ी बेटी इरफान ने फैसला किया कि पिता के सपने को वह पूरा करेगी। पाकिस्तान में किसी भी महिला के लिए इस सपने को पूरा करना आसान नहीं है लेकिन इरफान ने ऐसा किया।

लाहौर की 21 साल की इस स्टूडेंट के लिए यह जोखिम भरा कदम था लेकिन उसने बहादुरी के साथ इसे कबूल किया। इरफान पिछले दो सालों में एक निडर बाइकर्स के रूप में उभरी हैं। एक रूढ़िवादी देश में इरफान ने कई वर्जनाओं को धत्ता बताते हुए पूरे देश की यात्रा बाइक से की। वह बाइक पर अकले होती हैं। हालांकि इरफान के लिए यह सब कुछ इतना आसान नहीं था।

 zenith irfan

2013 में जब इरफान के छोटे भाई ने साधारण सी 70cc की बाइक खरीदी तो मां ने बेटी को बाइक ड्राइव करने के लिए सिखाने का आग्रह किया। मां भी चाहती थीं कि उनकी बेटी अपने पिता के सपनों को पूरा करे। इरफान ने सीएनएन से कहा, ‘शुरुआत में मेरे लिए यह बड़ा संघर्ष था। मैं कन्फ्यूज्ड थी कि एक साथ कैसे गियर, क्लच और ब्रेक मैनेज कर पाऊंगी। मैं बहुत ज्यादा कन्फ्यूज्ड थी लेकिन बाद में सब पर नियंत्रण पा लिया। मैं लाहौर में बाइक से सब कुछ करना शुरू किया।’

और पढ़े -   अमेरिका नहीं चाहता अफगानिस्तान में आतंकवाद का खात्मा और शांति: हामिद करज़ई

Read More -अलीशा अब्दुल्लाह – भारत की पहली महिला सुपर बाइक रेसर

पिछली गर्मी के जून महीने में इरफान ने बाइक से अकेले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाने के फैसला किया। यहां भारत और चीन की सीमा लगती है। इरफान ने कहा, ‘मैं इसलिए कश्मीर जाना चाहती थी क्योंकि उसके बारे में बहुत सुना था। लोग कहते थे कि कश्मीर जन्नत-ए-नजीर है। मैं नहीं चाहती थी कि कश्मीर को तस्वीरों में देखूं। मैं चाहती थी कि खुद बाइक से जाऊं और अपना अनुभव लूं।’

और पढ़े -   सऊदी अरब की मांगो की सूची के जवाब में क़तरियों ने भी की अपनी मांगो की सूची जारी

zenith irfan

इरफान ने बाइक से पहली यात्रा पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की की। इसके बाद शुरू हुआ पहाड़ों, नदियों से होते इस्लामाबाद के बाहरी इलाके मुरी का खूबसूरत सफर। मुरी पश्चिमी हिमालय की तलहटी दक्षिणी ढलानों पर स्थित है। यहां से इरफान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद गईं। इसके बाद वह उस इलाके से होते हुए नीलम घाटी के जंगलों से गुजरीं। यह बेहद खूबसूरत इलाका है।

इरफान ने कहा, ‘जब मैं सड़क पर होती थी तो लगता था कि मेरे दिमाग, शरीर और आत्मा एक साथ हो रहे हैं। मैं बिल्कुल खुद को आजाद महसूस कर रही थी। मैं बिल्कुल चिंतन कर सकती थी। सच में बिल्कुल अलग और स्पेशल अहसास हो रहा था। बेहद इमोशनल और मुक्त सफर।’

पहली बार बाइक की लंबी यात्रा की सफलता के बाद इरफान ने अगस्त 2015 में लाहौर से होते हुए उत्तरी पाकिस्तान के जरिए चीन की सीमा से लगते हुए खुनजेराब पास जाने का फैसला किया। इसकी कुल दूरी 3,200 किलोमीर है। यहां आने के बाद इरफान को काफी खुशी मिली। वहां विदेशी महिला बाइकराइडर्स जाती रही हैं। इरफान पाकिस्तान की पहली महिला बाइक राइडर्स थीं जो वहां पहुंचने में कामयाब रहीं।

और पढ़े -   अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से नाराज सिखों ने अमेरिका में पीएम मोदी का किया विरोध

20 दिनों की इस यात्रा में इरफान देवसाई मैदानों में भी गईं। यह दुनिया के सबसे उच्चतम पठारों में से एक है। यहां जाना अपने आप में खतरों को आमंत्रित करना है क्योंकि भूस्खलन की आशंका हमेशा बनी रहती है। रोड ऐक्सिडेंट का जोखिम भी बना रहता क्योंकि इन सड़कों पर ट्रक बड़े बेतरतीब ढंग से चलते हैं। इरफान ने कहा, ‘इन सबके बावजूद मैं डरी नहीं। मुझे मौत से डर नहीं लगता। यदि मौत ही आनी है तो यह अपने घर में भी आ सकती है।’


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE