अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया भर के मुस्लिमों को अपना निशाना बनाया. इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों के खिलाफ कई बयान दिए. लेकिन उनके इन बयानों से ‘माइकल कमिंग्स’ नाम का एक ईसाई शख्स मुस्लिमों से दूर होने के बजाय इस्लाम के करीब आता गया और फिर एक दिन उसने इस्लाम को अपना लिया.

माइकल कमिंग्स ने इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद अपना नाम उबैदाह रखा है. अपने बारें में बताते हुए उन्होंने कहा कि  मैं हमेशा अपने परिवार से अलग रहा. विशेषतौर पर में मेरी दूसरी संस्कृतियों के बारे में जानने की लगन रही. उन्होंने बताया कि हम दो भाई हैं. दोनों अमरीकी सेना का हिस्सा रहे.

ईसाई धर्म का होने के नाते मेरे दिमाग में उठने वाले सवालों का जवाब बाइबिल से जानने की कोशिश की. लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो मैं सच्चे धर्म की तलाश में जुट गया. इस दौरान ट्रम्प के चुनाव प्रचार ने मुझे आकर्षित किया. ट्रम्प के बयानों के कारण मुझे इस्लाम के बारें में जानने की जिज्ञासा बड़ी. जब इस बारें में  मुसलमानों से सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा कि कुरान पढ़ो और मैंने पढ़ना शुरू कर दिया.

उन्होंने बताया कि, कुरान पड़ने के बाद मुझे मेरे सवालों के जवाब मिलते गए. और मेने एक दिन इस्लाम कबूल कर लिया. जब मैंने अपनी माँ को बताया कि मैं इस्लाम धर्म कुबूल कर रहा हूं जिससे वह खुश नहीं थी (अभी भी नहीं है).मेरे इस्लाम में आ जाने के बाद वो मुझे दुश्मन के रूप में देखते है लेकिन चन्द परिवार के सदस्यों को खोने से मुझे 1.7 बिलियन नए भाई-बहन मिले हैं।.

उन्होंने कहा कि ‘मैं अपने सभी दोस्तों को भी इस्लाम की दावत देता हूं और इनमें कुछ ऐसे भी हैं जो इंशाअल्लाह जल्द ही इस्लाम स्वीकार कर लेंगे. मैं दुआ करता हूं कि अल्लाह मुझे और मेरे दोस्तों और यहां तक ​​कि मेरे परिवार को भी एक दिन इस्लाम में आने का रास्ता दिखा.


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