बिहर एक ऐसा राज्य है जहां पर प्रतिभा की कमी नही है  शिक्षा दर में पीछे होने के बावजूद यहां से सबसे अधिक आईएएस और आईआईटी जैसे से संस्था में  सफल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या है और इनमें ज्यादा गरीबी में पले -बढ़े विद्यार्थीयों की संख्या होती है अब मेडिकल के क्षेत्र में गरीब बच्चे अपना हुनर दिखा रहें हिया  उनमे एक  मो. सुफियान कैशर ने बिहार मेडिकल की परीक्षा में राज्य भर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है. सुफियान के पिता एक छोटे से किराना दुकानदार थे जिनकी तीन साल पहले मौत हो चुकी है.

राज्य भर में दूसरा स्थान प्राप्त करने के बाद वैसे तो सुफियान के घर में खुशियो का माहौल है लेकिन अब उनके सामने दूसरी बड़ी चिंता है आगे के पढ़ाई का खर्च निकालने की. इसके लिए उन्होंने बिहार के मुख्य मंत्री से आगे की पढ़ाई के लिए सहयोग करने की गुहार लगाई है. दरअसल
सुफियान के पिता बिहार शरीफ के पक्की तालाब मोहल्ले में किराना दुकान चलाते थे. आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उनकी तमन्ना बेटे को डॉक्टर बनाने की थी.

मगर तीन वर्ष पूर्व पिता के मौत के बाद घर का खर्च चलना भी मुश्किल हो गया था. ऐसी परिस्थिति में उनकी माँ हौसला बुलंद करती रही जिसके फलस्वरूप सुफियान ने बिहार शरीफ जैसे छोटे से शहर में रहकर अपनी पढ़ाई की और सफलता हासिल की. एक न्यूज़ पोर्टल से बात चित करते हुए सुफियान ने बताया था कि, ’2013 में जब मैं 10वीं में था तभी मेरे पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए और मेरे बोर्ड एग्जाम पास होने तक उनका इंतकाल हो गया था. उस वक़्त मैं काफी तनाव में था और 3-4 महीने तक कुछ नहीं कर पाया लेकिन मेरी माँ और बड़े भाई ने मेरा हौसला बनाए रखा. उन्होंने मेरी पढ़ाई में हरसंभव सहयोग किया. आज ये सफलता प्राप्त कर मुझे ख़ुशी है लेकिन दुःख इस बात का है कि मेरी ख़ुशी में मेरे पिता शामिल नहीं हैं.’

सुफियान ने काउंसलिंग के बाद PMCH में पढने की इच्छा जाहिर की है. वो आज वैसे छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं. (newsmanthan)


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