राजस्थान में कोलसिया गांव के एक हिंदू युवक राजीव शर्मा (28) ने धार्मिक सद्भाव की अनूठी मिसाल पेश की है। राजीव ने श्याम चालीसा का उर्दू में अनुवाद किया है। उनके मुताबिक संभवत: यह श्याम चालीसा का विश्व में पहला उर्दू अनुवाद है।
किताब का अनुवाद उर्दू में ही क्यों? इस सवाल पर उन्होंने बताया कि उर्दू भारत की भाषा है जिसने आजादी के आंदोलन में महान योगदान दिया। सबसे पहले इंकलाब जिंदाबाद का नारा देने वाली जबान उर्दू ही थी।

उन्होंने कहा कि 1947 में भारत-पाक विभाजन के बाद लोगों में यह भ्रांति फैल गई कि यह एक धर्म विशेष की भाषा है जबकि उर्दू किसी धर्म या मजहब की नहीं बल्कि हिंदुस्तान की जबान है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। यह देश की शान है।

राजीव ने बताया कि वे गांव का गुरुकुल नाम से एक ऑनलाइन लाइब्रेरी चलाते हैं। अगर कलम की ताकत का सही इस्तेमाल हो तो उसकी स्याही भाईचारे और मुहब्बत की जड़ों को सींचती है।

गौरतलब है कि इससे पहले राजीव शर्मा मारवाड़ी में पैगम्बर मोहम्मद साहब की जीवनी – पैगम्बर रो पैगाम भी लिख चुके हैं जो भारत सहित कई देशों में चर्चित हुई है।

असहिष्णुता के सवाल पर उन्होंने बताया कि देश में कुछ लोग गलतफहमी पैदा कर रहे हैं और मंदिर-मस्जिद के नाम पर नफरत का जहर फैला रहे हैं। ऐसे लोगों को अपना मार्गदर्शक समझना बंद करें क्योंकि ये मुल्क को कमजोर बना रहे हैं।

किसी भी धर्म का दूसरे से कोई विरोध नहीं है। हिंदू धर्म संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानता है और इस्लाम भाईचारे का पैगाम देता है। इसलिए लोगों में एक दूसरे के प्रति समझ बढऩी चाहिए ताकि नफरत के सौदागर कभी सफल न हो सकें।

 

 


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