राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि भारत की सरकार पाकिस्तान के साथ आपसी सम्मानजनक संबंध बढ़ाने और सीमापार आतंकवाद का सामना करने के लिए सहयोग का माहौल तैयार करने के प्रति कृत संकल्प है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि भारत की सरकार पाकिस्तान के साथ आपसी सम्मानजनक संबंध बढ़ाने और सीमापार आतंकवाद का सामना करने के लिए सहयोग का माहौल तैयार करने के प्रति कृत संकल्प है। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार देश की सुरक्षा से संबंधित सभी चुनौतियों से सख्ती से निपटने के लिए कृत संकल्प है। आतंकवाद विश्वव्यापी खतरा है और इसे पूरी तरह से समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर आतंकवाद निरोधी कठोर उपाए किए जाने की जरूरत है। राष्ट्रपति ने संसद की कार्यवाही में हंगामे के कारण अक्सर होने वाले व्यवधान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने सांसदों से कहा कि संसद हमारी जन आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है। लिहाजा अवरोध डालने की बजाय वाद विवाद और चर्चा को अपनाएं।

संसद का बजट सत्र शुरू होने पर दोनों सदनों की केंद्रीय कक्ष में होने वाली संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति की ओर से किए जाने वाले अपने पारंपरिक संबोधन में प्रणब ने कहा कि सरकार पाकिस्तान के साथ आपसी सम्मानजनक रिश्ते बढ़ाने और सीमापार आतंकवाद का सामना करने के लिए सहयोग का माहौल तैयार करने के प्रति कृत संकल्प है। राष्ट्रपति ने कहा कि आतंकवाद विश्वव्यापी खतरा है और इसे पूरी तरह से समाप्त करने के लिए विश्व स्तर पर आतंकवाद निरोधी कठोर उपाए किए जाने की जरूरत है।

पठानकोट वायु सेना स्टेशन पर हुए आतंकवादियों के हमले को सफलतापूर्वक करने के लिए सुरक्षा बलों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा- मेरी सरकार देश की सुरक्षा से संबंधित सभी चुनौतियों से सख्ती से निपटने के लिए कृत संकल्प है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम का अर्थ पूरा विश्व एक परिवार है और मेरी सरकार इस सिद्धांत के प्रति वचनबद्ध है। अपने पड़ोसी देशों के बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी ८ साथ संपर्क बढ़ाने के लिए उठाए गए हमारे कदमों में इस सिद्धांत की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। प्रणब मुखर्जी ने कहा- मेरी सरकार पड़ोसी देशों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य में विश्वास रखती है। भारत अफगानिस्तान को स्थायी, समावेशी और लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के सपने को साकार करने में अफगानिस्तान की जनता का सहयोग करने के प्रति वचनबद्ध है।

राष्ट्रपति ने संसद की कार्यवाही में हंगामे के कारण अक्सर होने वाले व्यवधान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। उन्होंने सांसदों से कहा कि संसद हमारी जन आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है। लिहाजा अवरोध डालने की बजाय वाद विवाद और चर्चा को अपनाएं। उन्होंने सभी सांसदों से अनुरोध किया कि वे सहयोग और आपसी सद्भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर एक समृद्ध भारत बनाने का प्रयास करें। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में चर्चा का सिद्धांत ‘आ नो भद्रा कृत्वो यंतु विश्वत:’ होना चाहिए। अर्थात चर्चा में सभी वर्गों के लोगों के सुविचार शामिल किए जाने चाहिए। इस माननीय संस्था का सदस्य होना गौरव की बात तो है, लेकिन इसके साथ महत्त्वपूर्ण दायित्व भी जुड़े हैं। अपने संबोधन में हालांकि उन्होंने जेएनयू या हैदराबाद विश्वविद्यालय में अशांति या हरियाणा में आरक्षण की मांग पर हिंसक आंदोलन का कोई उल्लेख नहीं किया।

संसद का बजट सत्र शुरू होने पर दोनों सदनों के केंद्रीय कक्ष में होने वाली संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति की ओर से किए जाने वाले अपने पारंपरिक संबोधन में प्रणब ने कहा- मेरी सरकार संसद के सुचारू और रचनात्मक कार्य संचालन के लिए निरंतर प्रयासरत है। लोकतांत्रिक प्रणाली में वाद विवाद और चर्चा जरूरत है, न कि अवरोध पैदा करने की। मैं सभी सांसदों से अनुरोध करता हूं कि वे सहयोग और आपसी सद्भावना के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करके एक समृद्ध भारत बनाने का प्रयास करें।

इस मौके पर भारत की आर्थिक स्थिति की तस्वीर रखते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अशांत वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत स्थायित्व की स्वर्ग स्थली है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर तेज हुई है, जिससे भारत विश्व की बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं में सबसे अधिक तेजी से वृद्धि दर्ज करने वाली अर्थ व्यवस्था बन गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा कम हुआ है और 2015 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा- मेरी सरकार ने बेहतर प्रशासन के लिए अनेक उपाए किए हैं और उसके तहत संस्थाओं को बेहतर बनाने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने व पुराने कानूनों को हटाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लगभग 1800 पुराने कानूनों को समाप्त करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि यही नहीं, सरकारी नौकरियों में भर्ती की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कनिष्ठ सरकारी पदों के लिए साक्षात्कार समाप्त कर दिए गए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा- मेरी सरकार ने कारोबार करने में सुगमता को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न राज्यों के बीच प्रतियोगी सहयोग को बढ़ावा दिया है। राज्य सरकारों को निवेश का माहौल सुधारने के लिए सरल प्रक्रिया अपनाने, ई संगत प्रक्रिया शुरू करने व अवसंरचना में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश समाप्त करने के उपायों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम में कड़े संशोधन भी किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा- पिछले साल संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए मैंने अपनी सरकार की परिकल्पनाओं की एक रूपरेखा बताई थी, जिसका आशय ऐसे भारत का निर्माण करना है जो भविष्य में पूरे आत्मविश्वास के साथ अग्रसर होगा। ऐसा सशक्त और दूरदर्शी भारत जो लोगों को विकास के वे सारे अवसर मुहैया कराएगा, जिनका संविधान में प्रावधान किया गया है। विकास का यह सिद्धांत ‘सबका साथ, सबका विकास’ में निहित है और यही मेरी सरकार का मूलभूत सिद्धांत है।

बजट सत्र के पहले दिन संसद के संयुक्त अधिवेशन में अपने अभिभाषण मे राष्ट्रपति ने मोदी की सरकार की उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत विश्व बैंक की कारोबार सुगमता की सूची में 12 स्थान ऊपर आ गया है, जबकि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) में 39 फीसद की वृद्धि हुई। मई 2014 में नई सरकार के गठन के बाद से देश में ऊर्जा की कमी चार फीसद से घट कर 2.3 फीसद रह गई है। उन्होंने कहा कि सरकार मई 2018 तक सभी गांवों को बिजली पहुंचाने और बिजली पारेषण व्यवस्था मजबूत करने को प्रतिबद्ध है। साथ ही उपभोक्ताओं को उचित और प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली सुलभ कराने के लिए शुल्क नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा लोगों को समर्थ बनाती है और इसके लिए सरकार ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बजट में 50 फीसद से अधिक बजट को छात्रवृति कोष के लिए आबंटित किया है। अल्पसंख्यकों के लिए ‘नई मंजिल’ और ‘उस्ताद’ नामक दो योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रणब ने कहा- हमारी सरकार 2022 तक सबको आवास प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में झुग्गियों, शहरी गरीबों, आर्थिक रूप से पिछडे वर्गों आदि के लिए दो करोड़ घर बनाने की योजना है।

प्रणब बोले- मेरी सरकार का लक्ष्य शिक्षित, स्वस्थ, स्वच्छ भारत का निर्माण करना है। इसके लिए प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए लगभग चार लाख 17 हजार शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के नए संस्थान स्थापित किए गए हैं जिसमें दो आइआइटी व छह आइआइएम ने कार्य करना आरंभ कर दिया है। (Jansatta)


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