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पहले ही तेज गिरावट का सामना कर रहे कच्चे तेल के बाजार में ईरान से प्रतिबंध हटने के बाद कोहराम मच गया है। सोमवार को तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2003 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गए। पिछले सप्ताह के आखिर में अमेरिका और यूएन द्वारा आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाने के बाद ईरान कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहा है। यूएन न्यूक्लियर वॉचडॉग ने शनिवार को कहा था कि तेहरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम में कटौती करने के अपने वादे को पूरा किया है। इसके बाद अमेरिका ने तत्काल ईरान पर लगाए आर्थिक प्रतिबंधों को वापस ले लिया।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी से जुड़े और इकनॉमिक स्टेटक्राफ्ट के प्रोग्राम डायरेक्टर रिचर्ड नेफ्यू ने कहा, ‘ईरान अब किसी भी देश को जितना चाहते तेल बेच सकता है और किसी भी कीमत पर।’ 2011 में ईरान पर बैन लगाए जाने से पहले वह 2 मिलियन प्रति बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है, जबकि बैन के चलते यह उत्पादन एक मिलियन प्रति बैरल से कुछ ज्यादा ही रह गया। रविवार को ईरान के डेप्युटी पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि ईरान कच्चे तेल के उत्पादन में इजाफा करने की तैयारी कर रहा है। मंत्री ने कहा कि ईरान प्रति दिन 5,00,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करेगा।

ईरान के इस ऐलान का बाजार तत्काल असर देखने को मिला और सोमवार को कच्चे तेल के दाम 27.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए। हालांकि बाद में सुधार के साथ 28.56 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार से सोमवार के बीच कच्चे तेल के दामों में एक पर्सेंट की कमी आ गई है। यही नहीं अमेरिकी कच्चे तेल पर भी ईरान की चाल का असर देखने को मिला है। अमेरिकी कच्चे तेल का दाम सोमवार को 2003 के बाद 28.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

वित्तीय संस्था एएनजेड के मुताबिक, ‘ईरान से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद तेल के दामों में तेजी से गिरावट होगी। हालांकि यह गिरावट ज्यादा लंबे दौर तक नहीं चलेगी।’ बैंक ने कहा, ‘ईरान अपने बढ़े हुए तेल उत्पादन को बेचने के लिए बाजार में डिस्काउंट ऑफर करने की रणनीति अपना सकता है, इससे निकट भविष्य में कच्चे तेल के दामों में कमी होने की संभावना है।’

बाजार में ईरान के बढ़े हुए उत्पादन का कच्चा तेल ऐसे समय में आया है, जब कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजार में पहले से ही गिरावट झेल रही हैं। हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि ईरान के तेल उत्पादन की गति में आने वाले समय में कमी आएगी। फिलहाल वह बाजार में अपनी पैठ बनाने के लिए उत्पादन बढ़ाने और डिस्काउंट पर बेचने की रणनीति अपना सकता है। तेल के दामों में कमी ने स्टॉक मार्केट को भी प्रभावित किया है। एशियाई स्टॉक मार्केट्स में गिरावट जारी है और यह स्तर 2011 के करीब पहुंच गया है। एचएसबीसी के एशियन इकनॉमिक्स रिसर्च के को-हैड फ्रैडरिक न्यूमैन ने कहा, ‘ग्रोथ धीमी हो रही है। तेल समेत तमाम कमोडिटीज के दामों में कमी घटती मांग को साबित करती है।’


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