वरिष्ठ लेखिका नयनतारा सहगल ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया कि वह ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के विरोध में लौटाया गया अपना साहित्य अकादमी अवॉर्ड फिर से स्वीकार कर रही हैं. सहगल ने indianculturalforum.in नाम की वेबसाइट से बातचीत में कहा, ‘अवॉर्ड वापस लेने की खबर झूठी है.’nayantara-sahgal-says-she-is-not-taking-back-sahitya-akademi-awardदूसरी ओर, लेखकों द्वारा अवॉर्ड वापस लेने पर आ रहे अलग-अलग बयानों के बीच साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने बताया कि नयनतारा ने खुद अवॉर्ड वापस लेने की कोई पेशकश नहीं की थी. एक अंग्रेजी अखबार को विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा, ‘साहित्य अकादमी ने पुरस्कार लौटाने वाले 40 लेखकों को चिट्ठी भेजकर कहा था कि हम पुरस्कार वापस नहीं ले सकते, क्योंकि हमारे नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. इसलिए वे सभी पुरस्कार वापस ले लें.’

नयनतारा ने नहीं की पहल
उन्होंने आगे कहा, ‘अकादमी के सचिव ने मुझे बताया कि इस बारे में जब नयनतारा जी को चिट्ठी भेजी गई, तो उन्होंने कहा कि आप अपने नियमों के मुताबिक काम करें. लेकिन नयनतारा जी ने खुद पुरस्कार फिर से स्वीकार करने की कोई पहल नहीं की थी. पुरस्कार डाक द्वारा नयनतारा सहगल समेत अन्य लेखकों को भेज दिए गए हैं. अब यह उन पर निर्भर करता है कि वे इसे स्वीकार करते हैं या नहीं.

सिर्फ नंद भारद्वाज ने की पहल
तिवारी ने कहा कि सिर्फ राजस्थान के लेखक नंद भारद्वाज ने पहल करते हुए अकादमी की बात मानी और पुरस्कार फिर से स्वीकार करने की बात कही है. हाल ही खबर आई थी कि साहित्य अकादमी की पहल के बाद साहित्यकारों और लेखकों ने लौटाए हुए सम्मान वापस लेना शुरू कर दिया है. इन 40 साहित्यकारों ने एमएम कलबुर्गी की हत्या और देश में असहिष्णुता का माहौल बताते हुए अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए थे.

अकादमी ने इन 40 लेखकों को चिट्ठी भेजकर बताया था कि वह पुरस्कार वापस नहीं ले सकती. इसके बाद खबर आई कि नयनतारा सहगल सहित 11 लेखकों ने अपनी रजामंदी अकादमी को भेज दी है. सहगल पुरस्कार लौटाने वाले शुरुआती लेखकों में थीं.


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