लखनऊ –  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा शायरा बानो मामले में विरोधी पक्ष बनने का फैसले लेने के बाद एक बार फिर शाह बानो केस जैसी स्थिति बन गई है। मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने फैसला लिया है कि वह तीन बार तलाक कहकर तलाक लिए जाने की इस इस्लामिक प्रथा में किसी भी तरह के बदलाव या छेड़छाड़ का सुप्रीम कोर्ट में विरोध करेगा। इससे पहले 80 के दशक में शाह बानो केस ने देश में काफी हलचल मचाई थी। उस समय भी इस मामले को लेकर समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि में लंबी बहस छिड़ गई थी।

 

1985 में इंदौर शहर में रहने वाली 62 साल की तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाह बानो ने सुप्रीम कोर्ट में एक केस किया था। शाह बानो ने अपने पति पर केस कर तालक के बाद गुजारा भत्ता दिए जाने की मांग की थी। अदालत ने शाह बानो के हक में फैसला सुनाया था। राजीव गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस्लामिक रुढ़िवादिता और मुस्लिम वर्ग के दबाव में आकर मुस्लिम महिला (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डिवोर्स) अधिनियम 1986 पास कर दिया। इस अधिनियम के द्वारा सुप्रीम कोर्ट का शाह बानो के पक्ष में सुनाया गया फैसला खारिज हो गया। इस अधिनियम ने निराश्रित और लाचार मुस्लिम महिलाओं से भी तलाक के बाद गुजारा भत्ता पाने का अधिकार छीन लिया।

शनिवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार द्वारा इस केस में दखलंदाजी करने की किसी भी कोशिश का विरोध करने का फैसला लिया। बोर्ड ने मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी भी तरह से दखल दिए जाने के प्रयासों को विफल करने का भी निश्चय किया है।

मौजूदा मामले में उत्तराखंड की शायरा बानो ने तीन बार तलाक कहकर तलाक लिए जाने की इस्लामिक प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। अदालत ने पिछले महीने इस याचिका को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जरूरतों पर गौर करने का भी फैसला लिया। अब मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने इस केस में विरोधी पक्ष बनने का फैसला किया है।

बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा, ‘SC ने इस केस में बोर्ड को एक पक्ष के तौर पर शामिल करने की अपील को मंजूर कर लिया है। अब बोर्ड शायरा बानो मामले में भी इसी तरह हस्तक्षेप को लेकर अपील करेगा।’ हैदराबाद के सांसद ओवैसी भी इस मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक मजबूत पक्ष पेश करने के लिए सबसे अच्छे वकीलों की सेवा लेनी चाहिए।

News Courtesy – NBT


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