पीडीपी के संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद जम्मू-कश्मीर के 12वें मुख्यमंत्री थे। 79 साल के सईद को सौम्य राजनेता के रूप में देखा जाता था। अपनी बेटी महबूबा मुफ्ती के साथ 1999 में खुद की पार्टी पीडीपी का गठन करने से पहले सईद ने अपने राजनीतिक करियर का लंबा समय कांग्रेस में बिताया।

व्यक्ति विशेष: देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री थे मुफ्ती मोहम्मद सईद

साल 1950 के दशक में वो जीएम सादिक की कमान में डेमोक्रेटिक नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्य भी रहे। नेशनल कांफ्रेंस के फारुक अब्दुल्ला की तरह गोल्फ प्रेमी सईद ने अपनी पार्टी के गठन के तीन साल के भीतर ही कांग्रेस के समर्थन से प्रदेश में अपनी सरकार बनाई थी। हालांकि, 2008 के विधानसभा चुनाव में वो हार गए और उमर अब्दुल्ला ने राज्य में अपनी पार्टी को जीत दिलाई।

एक गूढ़ वकील से लेकर देश के अब तक के एकमात्र मुस्लिम गृहमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद ने एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह राष्ट्रीय राजनीति और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपने लिए एक अलग मुकाम बनाया। लगभग छह दशक तक के अपने राजनीतिक करियर में सईद ताकतवर अब्दुल्ला परिवार के खिलाफ प्रतिद्वंदी शक्ति का केंद्र बनकर उभरे। राजनीति के खेल में हमेशा अपने पत्ते छिपाकर रखने वाले सईद अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप चलने के लिए विरोधाभासी विचारधाराओं वाले दलों के साथ भी दोस्ती में गुरेज नहीं करते थे।

12 जनवरी 1936 को अनंतनाग जिले के बिजबेहरा में पैदा हुए सईद श्रीनगर के एस पी कॉलेज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र रहे हैं जहां से उन्होंने कानून और अरब इतिहास में डिग्री हासिल की थी। सईद ने 1962 में अपने जन्मस्थान से डीएनसी की कमान में चुनाव जीत कर चुनावी सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने 1967 में भी इसी सीट से जीत हासिल की, जिसके बाद सादिक ने उन्हें उपमंत्री बनाया।

1972 में वो कैबिनेट मंत्री बने और विधान परिषद में कांग्रेस के नेता भी, 1975 में उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन वो अगले दो चुनाव हार गए। 1986 में केंद्र में राजीव गांधी की सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री पर्यटन के रूप में शामिल होने वाले सईद ने एक साल बाद मेरठ दंगों से निपटने में कांग्रेस के तौर-तरीकों का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। वहीं सन् 1989 में वो देश के पहले  मुस्लिम गृहमंत्री बने।

सईद के राजनीतिक सफर में दो सबसे अहम पड़ाव वर्ष 1989 और वर्ष 2015 में आए। वर्ष 1989 में वह स्वतंत्र भारत के पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने और बीते साल वह दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। आगामी 12 जनवरी को 80 साल के हो जाने वाले सईद ने इस बार जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभालने के लिए उस बीजेपी के साथ गठबंधन किया, जिसके लिए इस मुस्लिम बहुल राज्य में सत्ता में आने का यह पहला मौका था।

देश के पहले मुस्लिम गृहमंत्री की छवि को उस समय धक्का लगा, जब वीपी सिंह की अगुवाई वाली सरकार ने उनकी तीन बेटियों में से एक रूबिया की रिहाई के बदले में पांच लोगों को छोड़ने की आतंकवादियों की मांग के आगे घुटने टेक दिए थे। इसके बाद घाटी में आतंकवाद ने सिर उठाना शुरू किया था। उसी समय 1990 में वादियों से कश्मीरी पंडितों का विस्थापन शुरू हुआ। साभार: न्यूज़ 18


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें