2000rupees

कोहराम न्यूज़ नेटवर्क – 11 नवम्बर 2016 

दो दिन गुज़र चुके है बैंकों और एटीएम से नए नोट मिलना शुरू हो गये है, आम जनता को घंटों लाइन में लगने के बाद बाद कुछ हजार रुपयों की अदलाबदली भी हो रही है. यह सब ऐसा ही जैसे किसी छोटे बच्चे को मेला दिखाने की बात करना शुरू में तो बच्चे में बहुत उत्सुकता होती है, उतावलापन देखने बनता है लेकिन मेले की भीड़भाड़, धक्का मुक्की, शोरशराबा भी चलो एक बार में बच्चा बर्दाश्त कर लेगा लेकिन मेले से जो खिलौना वो लेकर आया हो, घर  आकर पता चले की खिलौना तो चल ही नही रहा है तब उस बच्चे की हालत क्या होगी.

इन दो दिन में नोटों को लेकर जितनी बातें की गयी है उनमे सबसे अहम् बात जिसका ज़िक्र अभी तक ना तो सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है ना है मेन स्ट्रीम मीडिया में. बात थोड़ी से लम्बी है इसीलिए पढ़ने में जल्दबाजी ना करें.

तमाम मुश्किलें झेलने के बाद जब लोगो के हाथ में 2 हजार का नोट आ रहा है तब वो ख़ुशी ख़ुशी बाज़ार जा रहा है ज़रूरत का सामान खरीदने लेकिन दुकानदार इतना बड़ा नोट लेने से मना कर दे रहे है. साफ़ बहाना यह बनाया जा रहा है की उनके पास 100-100 के इतने नोट नही है, दूसरी बात यह की नए नोट मार्किट में आ तो गये है लेकिन दूकानदार उन्हें लेने से डर रहे है की उनमे नोट को लेकर शक की गुंजाइश बनी हुई है.

हालाँकि यहाँ गौर करने वाली बात यह है की इसमें गलती ना तो ग्राहक की है ना ही दूकानदार की क्यूंकि अगर कोई ग्राहक 2000 का नोट लेकर 100 रुपए का सामान खरीदता है तो अब दुकानदार को सौ सौ के 19 नोट वापस करने होंगे, अब चूँकि सरकार ने सिर्फ नए नोट ही मार्किट में उतारे है पुराने नोटों की संख्या वही की वहीँ है तो ऐसे में जो 100 -100 के नोटों की पहले से किल्लत थी वो अब और अधिक हो जाएगी. बाज़ार में जितना बड़ा नोट जारी किया जायेगा छोटे नोटों की उतनी ही कमी होती जाएगी क्यों की बड़े नोट खुलाने पर एक नोट के एवज में 20 गुना तक छोटे नोट खपत होगी.

इससे पहले जहाँ 2000 की जगह 1000 रुपए का नोट चलन में था तो ग्राहक को 100 रुपए का सामान लेने के बाद सौ सौ के 9 नोट वापस मिलते वहीँ अब छोटे नोटों की खपत अचानक से कई गुना बढ़ जाएगी, छोटे नोटों की मांग तो बढ़ेगी ही साथ ही साथ दिन बा दिन उनकी कमी होती जाएगी, कैसे ..? फिर से उसी ग्राहक के पास चलते है जिसने 2000 का सामान लेकर 19 सौ सौ के नोट लिए है,  अब यह 19 नोट ग्राहक की सीधे जेब में जायेंगे और जब तक वो इन्हें नही चाहेगा तब तक मार्किट में खर्च नही करेगा तो इस तरह छोटे नोट ग्राहकों के पास जमा होते चले जायेंगे. अगर यही रहा तो पहले की तुलना में लगभग 5 से 10 गुना तेज़ी से छोटे नोटों की जमाखोरी बढती जाएगी.

इसका सीधा सा उपाय यह है की सौ-सौ के नोट भी मार्किट में बड़े नोटों के अनुपात में उतारें जाये जिससे बाज़ार की मंदी अचानक से कम ना होने पायें.

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