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नई दिल्ली – केंद्र सरकार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान की कैटिगरी में रखने को तैयार नहीं है। इसीलिए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील को वापस लेने का फैसला लिया है। हाई कोर्ट ने एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान मानने के खिलाफ फैसला दिया था।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि अजीज बाशा केस में उसका फैसला सही था। एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा इसलिए नहीं दिया जा सकता क्योंकि इसकी स्थापना संसद के एक कानून द्वारा की गई है।

2004 में एएमयू ने मेडिकल की पीजी सीटों में से 50 प्रतिशत सीट मुस्लिमों के लिए आरक्षित कर दी थीं। लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी। इसके बाद केंद्र सरकार और एएमयू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

अपील में एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान बताते हुए आरक्षण देने के कदम को सही ठहराया गया। 1920 में एमएओ कॉलेज को विघटित कर एएमयू ऐक्ट लागू किया गया था। 1951 में संसद ने एएमसू संशोधन ऐक्ट लाकर गैर मुस्लिमों का प्रवेश भी सुनिश्चित कराया।

1967 में सुप्रीम कोर्ट ने अजीज बाशा केस में एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से इनकार कर दिया। तर्क था कि इसकी स्थापना संसद के कानून से हुई है न कि किसी मुसलमान ने इसे बनाया है।

साल 1981 में संसद में एक संशोधन के जरिए इसे अल्पसंख्यक संस्थान माना गया। अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि 6 हफ्ते के भीतर वह अर्जी दाखिल कर बताएंगे कि अर्जी वापस क्यों लेना चाहते हैं।

Centre not to support AMU on granting it minority status

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