अपने नए प्रिंटर की उपयोगिता को दर्शाने के लिए वैज्ञानिकों ने उसमे मानव शरीर के कुछ अंग जैसे निचला जबड़ा, मांसपेशियाँ, उपास्थि और कान आदि बनाए हैं जो बिलकुल असली अंगों जैसे लगते हैं|

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इस बायो-प्रिंटर को बनाने में 10 साल से अधिक समय लगा है| काम के लिए प्रिंटर के पूरी तरह तैयार होने पर जैसे ही यह साबित हो जाएगा कि उसमें प्रिंट किये गए ऊतकों का प्रत्यारोपण मानव शरीर के लिए सुरक्षित है, तुरंत ही उसका उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में किया जाने लगेगा| अगर ऐसा होता है तो लोगों को शरीर के क्षतिग्रस्त या संक्रमित अंगों की जगह नयी हड्डियां, मांसपेशियां और उपास्थि उपलब्ध हो सकेंगी| बल्कि,प्रत्यारोपण हेतु प्रिंट किये जाने वाले कृत्रिम अंगों के माप में प्रत्येक मरीज़ की आवश्यकतानुसार, कंप्यूटर की मदद से, बदलाव करना भी संभव होगा|

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गिज़मोदो डिज़ाइन और तकनीकी ब्लॉग ने यह जानकारी दी है|


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