एक के बाद एक मिसाइल परीक्षण कर अमेरिका सहित दुनिया भर को हिला देने वाले उत्तरी कोरिया ने एक बार फिर से तगड़ा झटका दिया है. कहा जा रहा है कि रैन्समवेयर साइबर हमले में उत्तरी कोरिया का हाथ हो सकता है.

रैन्समवेयर साइबर हमले ने दुनिया के 150 देशों में 3 लाख से भी ज्यादा कंप्यूटर्स को प्रभावित किया है. सिमेंटेक और केस्परस्काई लैब ने बताया रैन्समवेयर वानाक्राइ सॉफ्टवेयर के पिछले वर्जन में जो कोडिंग इस्तेमाल की गई थी उसके कुछ कोड्स ऐसे थे जो लैजरस ग्रुप ने अपनी प्रोग्रामिंग में यूज किए थे. ध्यान रहे  लैजरस असल में उत्तर कोरिया का हैकिंग ऑपरेशन है.

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सिमेंटेक और केस्परस्काई लैब ने कहा कि वानाक्राइ की कोडिंग को पढ़ने के लिए अभी और समय चाहिए. साथ ही अब ये पता लगाया जा रहा है कि वानाक्राइ कहां से आया और किसने इसे बनाया. हालांकि दोनों कंपनियों का कहना है कि इन ताजा साइबर हमलों के पीछे उत्तर कोरिया का ही हाथ है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी.

हालांकि गूगल के सिक्यॉरिटी रिसर्चर नील मेहता ने इससे जुड़े सबूत ट्विटर पर साझा किए थे. दुनिया भर के शोधकर्ता इस बात का शोध करने में जुटे हैं कि आखिर ये साइबर अटैक करने वाला सॉफ्टवेयर आया कहा से.

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