microsoft

अमेरिका की संघीय अदालतें सीक्रेट सर्च वारंट देती हैं. इस वारंट के जरिये जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति के ईमेल पर नजर रखती हैं, इंटरनेट पर सुरक्षित रखी गई उनकी जानकारियों को टटोलती हैं. 1789 के ऑल रिट्स एक्ट के तहत कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ऐसे निगरानी संबंधी अधिकार दिए जा सकते हैं. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक इस कानून की आड़ में नागरिकों के संवैधानिक अधिकार का हनन हो रहा है.

अपनी ही सरकार पर मुकदमा करते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, “ग्राहकों के पास यह जानने का अधिकार है कि कब सरकार ने उनके ईमेल पढ़ने का वारंट लिया, और उन्हें यह बताना माइक्रोसॉफ्ट का अधिकार है.”

मुकदमा वॉशिंगटन के पास सिएटल की अदालत में दायर किया गया है. कंपनी का मुख्यालय भी सिएटल में ही है. दायर वाद के मुताबिक यह कहना कि लोगों को इसकी भनक लगेगी तो जांच में बाधा आएगी इसीलिए कंपनी चुप रहे, यह संविधान द्वारा दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है.

और पढ़े -   रोहिंग्याओं के नरसंहार को रोकना है तो म्यांमार पर लगे कड़े प्रतिबंध: ह्यूमन राइट्स वॉच

माइक्रोसॉफ्ट के चीफ लीगल अफसर ब्रैड स्मिथ ने अपने ब्लॉग में कहा, कुछ अनोखे मसलों को छोड़कर बाकी मामलों में लोगों और कंपनियों को यह जानने का हक है कि सरकार उनके ईमेल या रिकॉर्ड कब हासिल करना चाहती है.

case against america

बीते 18 महीनों में अमेरिका की संघीय अदालतों ने माइक्रोसॉफ्ट से डाटा हासिल करने के लिए करीब 2,600 आदेश दिए. स्मिथ ने इसे रोज का झंझट बताया, “अमेरिकी सरकार का आए दिन ऐसे आदेश देना सामान्य बात हो गई है. इन आदेशों में ईमेल सेवादाताओं से इस कानूनी मांग पर चुप्पी साधने को कहा जाता है. हमें लगता है कि बात हद से आगे निकल चुकी है और हम अदालत से इसका हल निकालने के लिए कह रहे हैं.”

और पढ़े -   ट्रम्प ने दिया क़तर अमीर को भरोसा, सऊदी अरब नहीं करेगा कोई सैन्य कार्रवाई

माइक्रोसॉफ्ट से पहले एप्पल और गूगल से भी अमेरिकी सरकार का ऐसा ही टकराव हो चुका है. ये सारी कंपनियां अमेरिकी हैं. बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इंटरनेट कंपनियां बाजार में अपनी साख बचाए रखना चाहती है. अगर लोगों को यह लगा कि फलां कंपनी उसकी जानकारी सुरक्षित नहीं रख रही है, तो वे कहीं और चले जाएंगे. यही वजह है कि हाल ही में एप्पल ने भी आईफोन खोलने के लिए खास कोड बनाने की एफबीआई की मांग को खारिज किया.

और पढ़े -   सांप्रदायिकता वैमनस्य पालने के बजाय अच्छी शिक्षा देने पर ध्यान दे भारत: नोबेल विजेता रामाकृष्णन

पहले लोग अपनी जानकारी कंप्यूटर पर ही रखते थे, लेकिन इंटरनेट में स्टोरेज की क्षमता बढ़ने से अब ज्यादातर डाटा इंटरनेट कंपनियों के पास रहता है. इस ढंग से डाटा सेव रखने को क्लाउडिंग कहा जाता है. माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक लोग उम्मीद करते हैं कि क्लाउड में उनकी जानकारी गोपनीय और सुरक्षित रहेगी. लेकिन अदालती आदेश बार बार इस संवैधानिक अधिकार से खेल रहे हैं.

असल में यह सारा विवाद अमेरिकी जासूस एडवर्ड स्नोडन के खुलासों के बाद शुरू हुआ. स्नोडन ने बताया कि अमेरिकी एजेंसियां कितने बड़े पैमाने पर दुनिया भर के लोगों की जासूसी कर रही हैं. उनकी जासूसी का शिकार कई देशों के शीर्ष नेता भी हुए.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE