फेसबुक ने अपने विवादास्पद ‘फ्री बेसिक्स’ प्रोग्राम को भारत में बंद करने का फैसला किया है। फेसबुक ने यह फैसला ट्राई के आदेश के बाद लिया है। हाल ही में टेलीकॉम रेगुलटर अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भारत में इंटरनेट डाटा के लिए अलग-अलग चार्ज को नामंजूर कर दिया है। इसके बाद फेसबुक के फ्री इंटरनेट बेसिक अभियान को तगड़ा झटका लगा।

फेसबुक को अपने इस प्रोग्राम के लिए कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था। फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के फ्री बेसिक्स प्लान के तहत ग्रामीण भारत के लाखों लोगों को मुफ्त में इंटरनेट सुविधा मुहैया कराने की बात कर रहे थे।

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आलोचकों का माना है कि फ्री बेसिक्स प्लान नेट न्यूट्रिलिटी के खिलाफ है। इंटरनेट के महत्वपूर्ण सिद्धांत नेट न्युटैलिटी के साथ समझौता से लोगों की स्वतंत्रता और जानकारी के उपयोग पर गहरे परिणाम होंगे। फ्री बेसिक्स का मकसद लोगों को मुफ्त में इंटरनेट नहीं बल्कि फेसबुक और अपने सहयोगियों की पहुंच बनाना है जबकि बाकी सभी वेबसाइटों तक पहुंचने के लिए यूजर्स से पैसे ऐंठने की योजना है।

फेसबुक के प्रवक्ता ने एक ईमेल के जवाब में कहा, “अब फ्री बेसिक्स भारतीय लोगों के लिए उपलब्ध नहीं रह गया है”।

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यह सर्विस रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ भारत में उपलब्ध थी। दिसंबर में, दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के निर्देश के चलते आरकॉम ने इस सेवा रोक लिया था।

इससे पहले फेसबुक बोर्ड के सदस्य मार्क एंड्रीसन ने बुधवार को एक नया विवाद खड़ा कर दिया। हालांकि उनके ट्वीट पर फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने सफाई दी है। जकरबर्ग ने एड्रीसन के ट्विट्स को उनका निजी विचार बताया है।

मार्क एंड्रीसन ने ट्राई के इस फैसले को ‘उपनिवेशवाद विरोधी’ बताते हुए कहा कि अच्छा होता यदि भारत ब्रिटिश शासन के अधीन रहता। सिलिकॉन वैली के जाने माने वेंचर कैपिटलिस्ट एंड्रीसन और उनके पार्टनर बेनेडिक्ट इवान्स ने फ्री बेसिक्स पर ट्राई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

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ट्विटर पर @pmarca की पहचान वाले एंड्रीसन ने लिखा, ‘उपनिवेशवाद विरोध दशकों से भारतीय लोगों के लिए आर्थिक रूप से विनाशकारी रही है। अब इसे क्यों रोका जाए। यह अपनी जनता के हितों के विरुद्ध भारत सरकार द्वारा लिए गए आर्थिक रूप से आत्मघाती निर्णयों की श्रृंखला की एक कड़ी है।’


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