भोपाल 22 साल के विकास को बचाया जा सकता था, अगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिल वहां से होकर न गुजरता जहां वह खून से लथपथ पड़ा था। उसे विधानसभा के बाहर एक बस ने टक्कर मार दी थी और वह बुरी तरह घायल हो गया था। लेकिन, दर्द से कराहते विकास को वक्त पर हॉस्पिटल नहीं पहुंचाया जा सका और उसकी मौत हो गई।
shivraj-2उस इलाके में तैनात भारी सुरक्षाबलों ने घायल युवक को बीच सड़क से बड़ी मुश्किल से उठाकर एक किनारे पर रख दिया ताकि मुख्यमंत्री का काफिला वहां से जा सके। वह तकरीबन 45 मिनट तक सड़क पर दर्द और खून में पड़ा रहा, लोग और पुलिसकर्मी देखते रहे। बाद में उसे हॉस्पिटल ले जाया गया जहां सिर में गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। इतना ही नहीं जब ऐम्बुलेंस आई और उसे जेपी हॉस्पिटल ले जाया गया तो वहां भी मेडिकल स्टाफ ने 20 मिनट से ज्यादा समय तक उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। तब तक वह हॉस्पिटल के बरामदे में ही लेटा रहा।

ऐम्बुलेंस सर्विस रेकॉर्ड देखने से पता चलता है कि उसे सुबह 11:45 पर हॉस्पिटल लाया गया था और 12:06 तक (ओपीडी रजिस्ट्री टाइम के मुताबिक) उसे किसी डॉक्टर ने नहीं देखा। डॉक्टरों ने उसे नर्मदा ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जहां दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई। विकास के पिता गोकुल प्रसाद असहाय से होकर अपने बेटे को मरते हुए देखते रहे। उन्होंने कहा,’मेरे बेटे को 20 मिनट से ज्यादा समय तक किसी ने नहीं देखा। डॉक्टर मेरे बेटे के गले से निकलते खून को रोक नहीं पाए क्योंकि उनकी मशीन काम नहीं कर रही थी।’ (NBT)


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