बेरली। सांप्रदायिक तौर पर बेहद संवेदनशीन माने जाने वाले बरेली शहर में होली के त्योहार को देखते हुए एक बेहद ही दिलचस्प फैसला सुनाया गया है। बरेली शहर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय की आबादी पचास-पचास फीसदी है। ऐसे में प्रशासन ने होली के त्योहार को देखते हुए एक आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि 24 मार्च को होली के दिन सरकार की तरफ से पेंटरों की एक टीम तैयार रहेगी। अगर किसी मस्जिद की दीवार पर होली का रंग गिर जाता है, तो ये सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए पेंटर फटाफट वहां सफेदी कर देंगे। इसके अलावा प्रशासन ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अगर किसी दीवार पर होली का रंग गिर जाता है तो तुरंत वहां सफेदी कर दें।

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बेरली नगर निगम और नगर पंचायत ने इस काम के लिए कई पेंटरों को नियुक्त किया है। ये सभी होली के दिन अलग-अलग मस्जिदों के पास तैनात रहेंगे। इसके साथ ही प्रशासन ने आदेश दिया है कि होली के दौरान किसी भी तरह के डीजे संगीत की इजाजत नहीं दी जाएगी।    अकेले बरेली शहर में ही करीब 300 मस्जिदें हैं। पूरे जिले में मस्जिदों की संख्या 1,000 के करीब है। एक मुस्लिम नेता ने प्रशासन ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि इस तरह सांप्रदायिक तनाव की हिंसा की स्थति को रोकने के लिए कोशिश करना तारीफ के काबिल है।   मजिस्ट्रेट को पूरे जिले में ऐसी जगहों को चिन्हित करने को कहा गया है जहां पहले त्योहार के दौरान साप्रदायिक तनाव की घटनाएं हो चुकी है। इन सभी जगहों का नाम नजदीकी पुलिस थाने में रिकॉर्ड रखा जाएगा। और इनके लिए विशेष सावधानी बरती जाएगी।

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यह आदेश जिला मजिस्ट्रेट ने जारी किया है। इसमें सर्किल अफसरों को संवेदनशीन इलाकों में छतों पर चढ़कर तलाशी लेने का आदेश दिया गया है। ताकि लोग नीचे सड़क पर खड़े या चलने वाले लोगों पर फेंकने के लिए ईंट या पत्थर ना जमा करें।   मस्जिद की दीवारों पर सफेदी के आदेश के बारे में पूछे जाने पर डीएम गौरव दयाल ने बताया कि हमारी योजना किसी भी तरह के तनाव के हालात पैदा होने से रोकना है। किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचने पर सांप्रदायिक तनाव की हालत पैदा हो सकती है। उन्होंने बताया कि एक समुदाय का त्योहार किसी दूसरे समुदाय के लिए तकलीफ या असुविधा की वजह नहीं बननी चाहिए।   वहीं शहर के एसपीक समीर सौरभ ने बताया कि हम शहर के अलग-अलग हिस्सों में असामाजिक तत्वों की पहचान का काम कर रहे हैं। ऐसे लोग जो आदतन दिक्कतें पैदा करते रहते हैं, हम उनकी पहचान कर रहे हैं। उन्हें आईपीसी की धारारों के तहत पहले ही नोटिस देंगे। जिन्हें कोर्ट में मजिस्ट्रेट के आगे एक बॉन्ड पर साइन करना होगा। इस बॉन्ड में उन्हें भरोसा देना होगा कि अगले 6 महीने के दौरान वे कानून-व्यवस्था की स्थिति में किसी तरह की दिक्कत पैदा नहीं करेंगे। (liveindiahindi)

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