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अयोध्या विवाद को शांतिपूर्वक समाधान खोजने का दावा करने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी की हकीकत सामने आ गई है. दरअसल वे इस विवाद का हल सुलाह से नही बल्कि जोर-जबरदस्ती और धमकाकर चाहते है.

दरअसल, अयोध्या विवाद के संबध में सुलह-समझौते का हवाला देकर गुपचुप तरीके से की बैठक में शामिल हुए बाबरी मस्जिद के मुस्लिम पक्षकार मोहम्मद इकबाल ने वसीम रिजवी पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वसीम रिजवी जो बात कर रहे हैं, वह एकदम नाजायज है. वह कह रहे हैं कि बाबरी मस्जिद में सब कुछ शिया का है, सुन्नी का कुछ नहीं है. ये एकदम जबरदस्ती की बात है.

इकबाल ने कहा कि हमें महंत नरेंद्र नरेंद्र गिरी ने बुलाया था, हमें यह नहीं मालूम था कि वहां पर कोई मीटिंग चल रही है और जिसमें हमें जाना है. यह भी नहीं मालूम था कि वहां पर वसीम रिजवी आए हैं.

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सुलह समझौता की वार्ता पर हम अपने यहां के साधु संतों से बात करेंगे. अपने पक्षकार भाइयों से बात करेंगे. किसी बाहरी और वसीम रिजवी जैसे इंसान के साथ बैठकर बात नहीं हो पाएगी क्योंकि अगर कहीं बात बन रही होगी तो बिगड़ जाएगी.

अंसारी ने बताया कि 5 दिसंबर के पहले एक बैठक हम भी बुलाएंगे, जिसमें हम सभी मुस्लिम पक्षकार और हिंदू पक्षकार तथा अयोध्या के सम्मानित सभी संत-महंतों को बुलाकर स्तर से एक बार और बात होगी.


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