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देश भर में कथित गौरक्षकों द्वारा मुस्लिम और दलित समुदाय के लोगों पर हिंसा को लेकर पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ी हैं. प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 80 फीसदी गौरक्षकों को फर्जी और असामाजिक कार्यों में लिप्त बताये जाने को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) भड़क गई है. इस बारें में VHP का कहना है कि प्रधानमंत्री को 2019 में इसकी कीमत चुकानी होगी.

आगरा की विश्व हिंदू परिषद की युनिट के उपाध्यक्ष सुनील पाराशर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ऐसा बयान देकर गौरक्षकों का अपमान किया है. मोदी को अगले लोकसभा चुनाव में इसकी कीमत चुकानी ही होगी. सुनील ने कहा, ‘हजारों कसाई लाखों गायों को हर साल काट रहे हैं उन्हें गुंडा नहीं बोला गया बल्कि गुंडा गीता रंबिया (जो अहमदाबाद में सालों पहले मारे गए थे) जैसे लोगों को बताया गया. इससे दिखता है कि प्रधानमंत्री मोदी का दिल अब बदल गया है. लेकिन मैं अब भी यही कहूंगा कि पूरे देश में गौ हत्या पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सुनील ने यह भी दावा किया कि विश्व हिंदू परिषद इकलौता ऐसा संगठन है जो गौ रक्षा के लिए काम कर रहा है.उन्होंने आगे कहा कि सरकार को एक सर्वे करवाकर यह पता लगाना चाहिए कि कौन सी ‘दुकानें’ ऐसी हैं जो गौरक्षा के नाम पर गाय का मांस बेच रही हैं.

उन्होंने पीएम मोदी को धमकी भरे अंदाज में कहा कि वह पाकिस्तान के साथ ज्यादा दोस्ती भरा रिश्ता ना बनाएं. वर्ना केंद्र में उनकी कुर्सी खतरे में पड़ सकती है.


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