शोच करती महिलाओं की तस्वीर लेने से रोकने पर बीजेपी नेताओं के नेतृत्व में स्वच्छ अभियान की टीम द्वारा मजदूर नेता जफर खान की पीट-पीट कर देने के मामलें को राजस्थान पुलिस रफादफा करने में जुटी हुई है. पांच दिन का लम्बा वक्त गुजर जाने के बावजूद भी अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

पुलिस बीजेपी के नेताओं के साथ मिली हुई है. साथ ही पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी झूठ बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है. बीजेपी की और से झगड़े के एडिट वीडियो जारी किये जा रहे है.  पुलिस पांच दिन बाद भी कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिलने का बहाना बना रही है.

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हालांकि चश्मदीदों का खाना है बताया कि जफर चाचा हमारी अवाज सुनकर गुस्से में आए थे और पहला वार भी किया था लेकिन उसके बाद उन्हें जमीन पर गिराकर उनके शरीर पर बैठकर पांच लोगों ने लगातार वार किया है. फिर सभी भाग गए. किसी तरह बस्ती वाले उन्हें आटो में डालकर ले गए.

वहीँ अस्पताल में रिकॉर्ड को भी बदला जा रहा है. सुबह के 7.30 बजे इमरजेंसी में जफर खान मृत अवस्था में लाए गए थे. जिसके बाद दस मिनट के अंदर उनको मोर्चरी में डिस्चार्ज कर दिया गया. मगर अब 7.40 को काटकर मोर्चरी भेजना 3.12 दिखाया गया है. यानी शव को सुबह साढ़े सात बजे से 3.12 तक इमरजेंसी में ही रखना बताया गया है.

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जबकि परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने कहा कि वो आईसीयू में हैं जहां किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है.


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