नई दिल्ली (30 मार्च): उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने कॉंग्रेस को जोर दार झटका देते हुए कहा कि 31 तारीख को विधानसभा में होने वाले शक्ति परीक्षण पर रोक लगा दी है। बीते दिन एकल पीठ के निर्णय पर रोक लगाते हुए कहा है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है, इसलिए विधानसभा में किसी दल को बहुमत है या नहीं इस पर शक्ति परीक्षण नहीं हो सकता। उच्च न्यायालय इस प्रकरण में अगली सुनवायी 6 अप्रैल को निर्धारित की है।

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केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस वीके बिष्ट की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार इस प्रकरण पर छह अप्रैल तक हलफनामा दाखिल करे। इस पर सुनवाई के बाद ही शक्ति परीक्षण पर आखिरी फैसला लिया जायेगा। खबरों के मुताबिक, केंद्र ने यह कहते हुए दो जजों वाली बेंच के सामने अपील की थी राष्ट्रपति शासन पर कोई भी कोर्ट स्टे नहीं लगा सकता है। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी बागी विधायकों को वोटिंग अधिकार पर दिये जाने पर आपत्ति जताई थी।

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वोटिंग के दौरान सदन में कोर्ट का पर्यवेक्षक रखे जाने पर भी कांग्रेस को आपत्ति थी। सिंगल जज बेंच ने मंगलवार को अपने फैसले में कहा कि गुरुवार (31 मार्च) को रावत सरकार के शक्ति परीक्षण में अयोग्य ठहराए गए 9 विधायकों समेत सभी विधायक हिस्सा लेंगे। हालांकि, 9 बागी विधायकों का वोट अलग रखा जायेगा। हाई कोर्ट ने शक्ति परीक्षण के दौरान विधानसभा की कार्यवाही पर निगरानी रखने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने की भी बात कही थी। इसके पहले, कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को पिछले दिनों विधानसभा स्पीकर ने सस्पेंड कर दिया था और केंंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन भी लगा दिया गया था। (News24)

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