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उडी हमले के विरोध और उसके बाद पाकिस्तानी सेना की और से सीमा पर गोलीबारी से नाराज विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत ने पाकिस्तानी उलेमाओं के बहिष्कार का फैसला किया हैं. 24 नवंबर को होने वाले सालाना उर्स-ए-रजवी में दरगाह आला हजरत ने किसी भी पाकिस्तानी उलेमा को नहीं बुलाने का फैसला किया हैं.

ये फैसला तब लिया गया जब पाकिस्तान के 6 प्रमुख उलेमाओं की और से उर्स में शामिल होने की गुजारिश आई है. लेकिन दरगाह ने इस बार किसी भी पाकिस्तानी उलेमा को उर्स में शामिल होने की इजाजत नहीं देने का फैसला किया हैं. दरगाह के प्रवक्ता मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी ने कहा कि हमने पाकिस्तानी उलेमाओं के बहिष्कार का फैसला किया है, जिसके जरिए हम यह बता देना चाहते हैं कि वे लोग भी दहशतगर्दी के खिलाफ आवाज बुलंद करें.’

उन्होंने आगे कहा कि मुफ्ती ने कहा, ‘जब भी  कोई आतंकवादी हमला होता है, भारत के मुसलमानों को उसकी वजह से परेशानी होती है क्योंकि उन्हें शक की निगाह से देखा जाता है. उन्होंने फैसले के बारे में आगे बताया कि स्थानीय उलेमाओं ने तय किया है कि वे उर्स में विदेशों से आने वाले सभी उलेमाओं से गुजारिश की जायेगी कि वे पाकिस्तानी नेताओं से दहशतगर्दी की मजम्मत करने को कहें और दोनों मुल्कों  के बीच दोस्ती का माहौल बनाने की कोशिश करें.

उन्होंने उर्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि तीन दिवसीय उर्स में फ्रांस, दुबई, मॉरीशस, नीदरलैंड्स, साउथ अफ्रीका और ओमान के उलेमा शामिल होंगे.


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