उर्दू ने 700 सालों तक हिन्दी भाषा को अपनी कोख में संभाल कर रखा। अब इसे हिन्दी और पंजाबी भाषा संभालने का काम कर रही है। आज उर्दू भाषा को तवज्जो देने की निहायत आवश्यकता है। इस कार्य की शुरूआत हरियाणा साहित्य संगम के मंच से हो चुकी है। इस मंच पर पहली बार उर्दू अदब में हरियाणा का हिस्सा और उर्दू जुबान के मसले अौर उनका हल पर मंथन करने के विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया। सभी विशेषज्ञों ने साहित्यिक सत्र में मंथन किया। उधर, हरियाणा साहित्य संगम के प्रथम दिन के दूसरे सत्र में आज पंजाबी साहित्य में लघु कहानी की स्थिति विषय पर चर्चा की गई।

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इस दौरान पंजाबी लघु कहानी लेखक जगदीश राय कुलरिया के काव्य संग्रह ‘पंजवां थंब’ तथा डॉ. हरप्रीत राणा के लघु कहानी संग्रह ‘तत्काल’ का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाबी साहित्य अकादमी के निदेशक अश्वनी गुप्ता ने की और अध्यक्षीय भाषण अकादमी के वाईस चेयरमैन डा. नरेन्द्र विक्र ने प्रस्तुत की।

शुक्रवार को देर सायं इन्द्रधनुष परिसर के हाली सभागार में हरियाणा के उर्दू साहित्यकारों एवं लेखकों के महास मेलन के प्रथम सत्र का शुभारंभ कुमुद बंसल ने किया। पहले सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. नाजमा जबीं ने हरियाणा के प्राचीन इतिहास पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि हरियाणा की सरजमीं का उर्दू भाषा से गहरा संबंध रहा है। इस प्रदेश के अंबाला, करनाल, हिसार ओर मेवात जिलों ने अनेक उर्दू शायर दिए हैं। साहित्यिक सत्र के इस कार्यक्रम में जाने-माने आलोचक गिरिराज शरण अग्रवाल ने बतौर मुख्य अतिथि तथा वरिष्ठ साहित्यकार डा. चंद्र त्रिखा ने अध्यक्षता की।

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विशिष्ट अतिथि के रूप में गीतकार वीरेंद्र मधुर व डॉ. अनुपम अरोड़ा मौजूद थे। ‘रूबरू’ कार्यक्रम में जनकवि मेहर सिंह सम्मान से नवाजे गए हरियाणा के प्रसिद्ध लेखक डॉ. संतराम देशवाल ने अपने विचार रखे। श्रेष्ठ महिला रचनाकार सम्मान पाने वाली सिरसा से आई डॉ. शील कौशिक ने अपने जीवन के अनछुए पहलुओं से अवगत करवाया। रामफल चहल, ओमप्रकाश कादयान समेत कई वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपने अनुभव एवं लेखन रूचि को शब्दों में पिरोते हुए युवाओं का मार्गदर्शन किया।

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देश में बढ़े हिन्दी का प्रचलन
बिहार ग्रंथ अकादमी के निदेशक दिनेश कुमार झा ने हरियाणा साहित्य संगम में युग-युगेन हरियाणा विषय पर मुख्य अतिथि के तौर पर कहा कि वे हरियाणा के हिन्दी रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी रचनाओं को प्रकाशित करवाने में सहायता करेंगे ताकि देश में हिन्दी का प्रचलन बढ़ सके। उन्होंने कहा कि ऐसे हिन्दी रचनाकारों को वे नियमानुसार रोयल्टी उपलब्ध करवाते रहेंगे, जिससे लोगों को आय होती रहेगी


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