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उदयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाकर नौकरी छोडऩे वाले दलित आईएएस अफसर उमराव सालोदिया के मामले के गूंज अभी तक सुनाई दे रही है। इसे लेकर गर्म हुए माहौल के बीच अब उदयपुर के जिला प्रमुख और भाजपा नेता शांतिलाल मेघवाल ने भी इसी तरह के भेदभाव के आरोप जड़ दिए हैं।

मीडिया से बातचीत के दौरान मेघवाल ने कहा, मैं दलित परिवार से हूं। इसलिए कलेक्टर रोहित गुप्ता मेरी बात नहीं सुनते। दलितों के प्रति उनका रवैया ठीक नहीं है। वे मुझे पंचायती राज से जुड़े कार्यक्रमों में भी नहीं बुलाते। कलेक्टर की तरह ही उनके मातहत काम करने वाले ऊंची जाति के अफसर भी ऐसा ही करते हैं।

डीबी से बातचीत के दौरान मेघवाल ने अपनी भाजपा सरकार के गृह मंत्री गुलाब चंद पर भी सवाल खड़े कर दिए। शांतिलाल मेघवाल ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी मंत्री गुलाब चंद को भी दी, लेकिन उन्होंने भी मेरी बात नहीं सुनी।

जिला प्रमुख ने बताया कि पिछले दिनों गोगुंदा की रावलिया पंचायत को खुले में शौच मुक्त घोषित किए जाने के कार्यक्रम में मुझे नहीं बुलाया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर, जिला समन्वयक अरुण चौहान व स्वच्छ भारत मिशन प्रभारी अजीतसिंह गलूंडिया पहुंचे थे, लेकिन अचानक मैं वहां पहुंचा तो इनके चेहरे उतर गए। इसी तरह कोटड़ा में तेंदूपत्ता वितरण के कार्यक्रम में भी मुझे नहीं बुलाया।

मेघवाल ने साफ किया कि पंचायती राज के कई कार्यक्रम, जो कि जिला प्रमुख के बिना नहीं होने चाहिए उन कार्यक्रमों में कलेक्टर और अधिकारी प्रमुख को दलित होने के कारण आमंत्रण भी नहीं देते हैं।

उन्होंने कहा कलेक्टर स्तर के अधिकारियों की सीआर भरने का काम जिला प्रमुख करता है, लेकिन पिछले एक साल से उनके पास सीआर भरने के लिए कोई फॉर्म भी नहीं आया तो वे किसकी सीआर भरेंगे। जिला प्रमुख इस उपेक्षा के लिए उनका दलित होना मानते हैं।

दूसरी ओर कलेक्टर रोहित गुप्ता ने कहा कि जिला प्रमुख के आरोपों का कोई आधार नहीं है। गुप्ता ने कहा कि अगर मेघवाल को कोई समस्या थी तो वह उन्हें बताते। मैं सभी जनप्रतिनिधियों का सम्मान करता हूं। दलित भेदभाव जैसी बात तो सोच भी नहीं सकता।


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