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सोमवार को केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी पीतल नगरी कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मैं थी! यहाँ पर एक बेखोफ़ हस्तशिल्पी ने बेबाक अंदाज़ मैं स्मृति ईरानी के सामने अपनी परेशानियाँ बताई, तो सब अवाक रह गये!
मौका था देश की एक्सपोर्ट प्रमोशन की सबसे बड़ी संस्था (ईपीसीएच) के मुरादाबाद रिसोर्से सेंटर के उद्‍घाटन का! होटल रीजेन्सी मैं चल रहे प्रोग्राम मैं पहले तो निर्यातको ने अपनी बात और बड़ी बड़ी बाते की! जब मौका हस्तशिल्पीयो का आया तो हाजी माशक़ूर हसन ने हस्तशिल्पीयो का दर्द रखते हुए, ऐसा हमला बोला की निर्यातको से लेकर संस्था के अधिकारी भी सकते मैं आ गये!
उन्होने कहा की सरकार हर साल करोड़ो रुपये हस्तशिल्पीयो को भेजती है, लेकिन दस्तकारो को कुछ नही मिलता! निर्यातको के सामने ही मशक़ूर ने मंत्री से कहा, निर्यातक दस्तकारो को बंधक बनाकर काम कराते हैं, उनसे मोबाइल गेट पर छीन कर बाहर से ताले लगा दिए जाते हैं! दस्तकारो के घर मोत भी हो जाए तो अपना काम वक़्त पर कराने के लालच मैं उन्हे खबर नही दी जाती!
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इस दौरान मेयर विनोद अग्रवाल ने मशक़ूर को कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन वह बिना रुके मंत्री से बोले की नगर मैं जाकर किसी भी दस्तकार से पूछ लीजिए, कलस्टर योजना क्या है! सारी योजनाए सिर्फ़ कागजो पर चल रही हैं! इस पर स्मृति ईरानी ने माइक संभाला और सवाल किया की अगर दस्तकारो के घर आउँ तो स्वागत करोगे! मशक़ूर के हाँ कहने पर मंत्री ने कहा अगली बार फाइव स्टार होटेल मैं नही आपके घर आउंगी!
गौरतलब है की मुरादाबाद, (सरायतरीन) संभल जैसे शहर अपनी शानदार दस्तकारी के लिए दुनिया मैं मशहूर हैं! लेकिन सरकारी बेरूख़ी की वजह से यहाँ के दस्तकार तंगहाली की ज़िंदगी जीने को मज़बूर हैं! दस्तकारो को अपनी कला का वज़िब दाम नही मिलता! उनके प्रोत्साहन, विकास और सहयता के लिए कुछ सरकारी योजनाए सिर्फ़ कागजो पर चलती है और अधिकारियो और कुछ संस्थाओ के लिए फायेदा का सोदा साबित होती है!
दस्तकार शिक्षा, स्वस्थ, बिज़ली और पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतो के लिए भी तरस रहे हैं! उनके हुनर के दम पर डॉलर कमाने वाले निर्यातक और सरकारो को उनकी कोई परवाह नही!
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मुहम्मद वसीम बरकाती

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