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दुनिया भर में डॉक्टर को भगवान् का दूसरा रूप माना जाता हैं लेकिन डॉक्टर अब अपने इस रूप को भुला बेठे हैं. ऐसे कई मामलें सामने आ रहें हैं जिनमे डॉक्टर्स हैवानियत धारण कर चुके हैं जिसके चलते मरीजों को काल के मुंह में जाना पड़ा.

ऐसा ही एक मामला बदायूं जिले में पेश आया जहाँ एक विकलांग महिला का सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने से इसलिए इंकार कर दिया गया क्योंकि वह एचआईवी पीड़ित थी. जिसके बाद महिला को प्रसव के लिए 50 किलोमीटर दूर बरेली लेकर जाया गया. इलाज में देरी के चलते महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया.

पीडिता का आरोप है कि जब उसने डॉक्टरों से उसके इलाज के लिए कहा तो उसे एचआईवी पीड़ित बताते हुए डॉक्टरों ने इलाज से इंकार कर दिया. पीडिता के पति के अनुसार उन्हें जांच और खून के लिए भटकाया गया और अंत में मेरी पत्नी का इलाज न करके हॉस्पिटल स्टाफ ने पत्नी को बरेली जिला अस्पताल ले जाने के लिए कह दिया.

श्याम ने के अनुसात जब तक हम बरेली पहुंचते देर हो गई थी और हमारा बच्चा मर चुका था. बदायूं के सीएमओ डा. सुनील कुमार ने इस मामलें पर कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी है और इस संबंध में उन्होंने जांच के आदेश दिए हैं


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