उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में योगी सरकार पर अत्याचार का आरोप लगाते हुए करीब पचास दलित परिवारों ने हिन्दू धर्म त्याग दिया था. इन सभी परिवारों ने दलित धर्म त्यागने के साथ ही इस्लाम धर्म अपनाने का ऐलान किया था. हालाँकि वे इस्लाम धर्म नहीं अपना सके.

दरअसल ये सभी लोग शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद कलमा पड़ इस्लाम कबूल करना चाहते थे. लेकिन उनके पास कोई उलेमा नहीं पहुंचे और वे इंतजार करते रह गए. ऐसे में अब किसी और धर्म अपनाने की सोच रहे हैं. वाल्मीकि समाज के नेता लल्ला बाबू द्रविड़ ने बीबीसी को बताया कि आने वाले एक-दो दिन में वो लोग तय कर लेंगे कि उन्हें किस धर्म को अपनाना है.

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उन्होंने बताया, “उलेमा लोग बुधवार को आए थे लेकिन अगले दिन आने की बात कहकर भी नहीं आए. उस दिन तय हुआ था कि शुक्रवार को नमाज़ पढ़ाने के साथ ही हमें इस्लाम में शामिल किया जाएगा. लेकिन अब हम लोग सोच-समझकर ही किसी दूसरे धर्म में जाएंगे.”

हालांकि लल्ला बाबू और उनके साथियों ने अभी किसी नए धर्म को नहीं अपनाया है लेकिन ये भी कह रहे हैं कि वो वापस हिंदू धर्म में नहीं लौटेंगे. लल्ला बाबू का दावा है कि सैकड़ों की संख्या में संभल, बरेली, मुरादाबाद और आस-पास के इलाकों के वाल्मीकि समुदाय के लोग हिंदू धर्म त्यागने की तैयारी में हैं.

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