20 मिनट में ही निपट गई बीजेपी की दलित सद्भावना बैठक

ऊना में दलित अत्याचार के बाद दलितों में बड़ते अपने विरोध को शांत करने के लिए बीजेपी ने गुरुवार को दलितों के साथ सद्भावना मीटिंग आयोजित की थी. लेकिन दलितों के विरोध के कारण यह बैठक 20 मिनिट में ही समाप्त हो गई.

बिना किसी नतीजे के खत्म हुई बीजेपी और दलितों की सद्भाव मीटिंग में 200 के करीब दलितों ने समरसता सम्मेलन पर बात करने से पहले ही इन्कार कर दिया था. इस बैठक के फ़ैल होने का कारण भाजपा नेता गिरीश परमार के भाषण को बताया जा रहा हैं. परमार ने अपने भाषण में बीएसपी अध्यक्ष मायावती की आलोचना की थी जिसके बाद भारी संख्या में मौजूद दलितों के विरोध का उन्हें सामना करना पड़ा.

सभा ने मोजूद दलितों ने बीजेपी को मनुवादी पार्टी बताकर सभी दलितों ने सभा स्थल छोड़ दिया और सभा का बहिष्कार कर सभा स्थल से जाने लगे. सभा में मौजूद दलितों ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्हें पहले बोलने का मौका नहीं दिया और उनकी दलीलों की अनदेखी की गई.

ऊना से भाजपा के पूर्व विधायक कालू राठौड़ ने, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी की एक “पूर्व नियोजित साजिश ‘ को बैठक के विघटन के लिए दोषी ठहराया. उन्होंने कहा ये दल राज्य में शांति और सद्भाव नहीं चाहते है साथ ही ये दलितों को भड़काने में लगे हैं. और विधानसभा चुनाव अगले साल तक ऐसा जारी रखेंगे.


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