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राजस्थान के अलवर में गौरक्षा के नाम पर उमर की बेदर्दी से की हत्या से पूरा देश के एक बार फिर से सिहर उठा है. साथ ही अब ये सवाल भी उठने लगा है कि क्या देश में मुस्लिमों के लिए गाय पालना कानूनन अपराध घोषित कर देना चाहिए. ताकि इस आतंक से मुसलमान से दूर रहकर तो बच सके.

आठ बच्चों का पिता उमर सर्दियों के मौसम में अपने बच्चों के लिए दूध की जरुरत को पूरा करने के लिए 15 हजार का कर्ज लेकर गाय खरीदने पहुंचा था. लेकिन उसके कभी नहीं सोंचा था कि बच्चों की भूख को गाय के दूध से मिटाना इस देश में मुसलमानों के लिए गुनाह बन चूका है. जिसकी कानून में तो कोई सज़ा नहीं हालंकि आस्था के नाम पर सज़ा ए मौत ह.

उमर के पिता सहाबुद्दीन ने बताया कि उमर के घर में कभी गाय नहीं थी. लेकिन सर्दियों में बच्चों को दूध की जरुरत होती है. ऐसे में उसने गायों को खरीदने का मानस बनाया. गांव के लोगों से उसने 15 हजार रुपए उधार(कर्ज) लिए थे और उन्हीं रुपयों से गायें खरीदने गया था.

उमर के पिता ने यह भी कहा कि हम कभी भी गाय का मांस नहीं खाते क्यों कि गाय ही एकमात्र पशु है जिसके दूध से हमारे बच्चों वो पोषण और शक्ति मिलती है जिसकी उन्हें जरूरत होती है.  इस घटना के बाद अब उमर के आठ बच्चों और विधवा पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है.

80 वर्षीय पिता सहाबुद्दीन मोहम्मद तीन रातों से सो नहीं पाए हैं. उनका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है. उनके सामने बस अब एक ही सवाल है कि इन बच्चों का क्या होगा ?


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