भोपाल: राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश में भी दो दलित आईएएस वर्ग के अफसरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दोनों आईएएस दलित-आदिवासी फोरम के बैनर तले भोपाल में धरने पर बैठ गए हैं. दरसअल, राजधानी में टीटी नगर स्थित अंबेडकर आईएएस रमेश थेटे और निलंबित आईएएस शशि कर्णावत ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि मप्र में अनूसूचित जनजाति और जनजाति के अफसरों और कर्मचारियों के साथ सरकार भेदभाव कर रही है.

MP: रोते हुए आईएएस रमेश थेटे बोले- सरकार ने अब नोटिस भी दिया, तो अन्न-जल त्याग दूंगा

इस दौरान आईएएस रमेश थेटे अपनी बात करते हुए मंच पर ही रो पड़े. रुंधते गले से उन्होंने कहा कि, अब अगर सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया, तो वे अन्न-जल त्यागकर मौत को गले लगा लेंगे. वहीं, बर्खास्त आईएएस सुश्री शशि कर्णावत ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश सरकार 27 महीने से उन्हें प्रताड़ित कर रही है. सुश्री शशि का आरोप है कि सरकार ने भेदभाव करते हुए उनका वेतन भी रोक दिया है.

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फोरम के संयोजक मोहनलाल पाटिल के मुताबिक, यदि इसके बाद भी प्रदेश में भेदभाव बंद नहीं हुआ तो जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा. दलित-आदिवासी फोरम ने इस संबंध में पीएमओ दफ्तर को भी शिकायत दर्ज कराई है.

राजस्थान में भी दलित आईएएस खफा: गौरतलब है कि राजस्थान के सीनियर आईएएस उमराव सालोदिया ने इस्लाम कबूल करते हुए नाम बदलकर उमराव खान रख लिया है. सालोदिया ने सर्विस पूरी होने से 6 महीने पहले ही रिटायरमेंट भी ले लिया है. उन्होंने प्रदेश की वसुंधरा सरकार पर प्रमोशन न देने का आरोप लगाया था.

जानिए, थेटे का मामला: दरसअल, रिश्वत लेने के आरोप में 2008 में सेवा से बर्खास्त किए गए थेटे को हाईकोर्ट ने बेदाग साबित किया था, तब राज्य सरकार ने उन्हें वर्ष 2011 में नौकरी में वापस लेते हुए उपसचिव पुर्नवास बनाया था.

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यहां से नर्मदा घाटी विकास विभाग में संचालक, अपर आयुक्त राजस्व और इसके बाद मंत्रालय में नगरीय प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग में अपर सचिव बनाया गया था.

थेटे अपनी पदोन्नति के लिए कई बार मुख्यमंत्री और मुख्यसचिव को पत्र लिख चुके थे. जिसके बाद हाल ही में सरकार ने सुपरटाइम स्केल में पदोन्नत करते हुए बाल संरक्षण आयोग में सचिव बनाया.

एक मामले से बरी होने के बाद आईएएस रमेश थेटे पर अब सीलिंग की जमीन में गड़बड़ी के आरोप हैं. जिससे सरकार को करोड़ों रुपए की क्षति हुई है. सीलिंग से मुक्त करके थेटे ने सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचाया. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने थेटे के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति दी है.

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शशि कर्णावत का मामला: शशि कर्णावत को मंडला के विशेष न्यायालय ने 27 सितंबर 13 को जिला पंचायत में वर्ष 1999-2000 में हुए प्रिंटिंग घोटाले में दोषी पाते हुए पांच वर्ष के कारावास और 50 लाख रुपए का जुर्माना किया था.

उनको जेल भी भेज गया था. बाद में कर्णावत जमानत पर बाहर आ गई. उस समय राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी थी. भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त होने वाली आईएएस कर्णावत प्रदेश की दूसरी महिला आईएएस हैं. इससे पहले आईएएस टीनू जोशी को बर्खास्त किया जा चुका है. साभार: न्यूज़ 18


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