2002 के गुजरात दंगों की चपेट में आये नरौदा पाटिया का आज गुजरात हाईकोर्ट के दो जजों ने मुआयना किया. बुधवार को अदालत द्वारा जारी एक आदेश के तहत डिविजन बेंच के दो जस्टिस हर्षा देवानी और ए एस सुपेहिया नरौदा पाटिया क्षेत्र पहुंचे.

नरौदा पाटिया 2002 में हुए गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित इलाका था. यहाँ पर 96 लोगों की हत्या हुई थी. जिनमे ज्यादातर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे. इस मामले में 30 अगस्त 2012 को एसआईटी ने कोडनानी समेत 29 लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई हुई है. हालांकि फिलहाल वह जमानत पर हैं,

इसके अलावा बाबू बजरंगी को अदालत ने हत्या और अपराधिक साजिश के मामले में पुरे जीवन तक की सजा सुनाई हुई है. दौरे के दौरान न्यायाधीशों ने घटनास्थल पर दो घंटे बिताए.

दरअसल, मामले की सुनवाई की शुरुआत के साथ ही दोनों पक्षों के वकील अदालत से घटनास्थल का दौरा करने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि घटना कैसे हुई थी इसकी बेहतर समझ हो सके और बड़े क्षेत्र में फैले इलाके का ज्ञान हो सके. जिसके बाद अदालत ने ये फैसला लिया था.


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