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मध्यप्रदेश के बलाघाट के बैहर में 25 सितंबर की रात को आरएसएस के जिला प्रचारक सुरेश यादव की कथित मारपीट और टीआई जियाउल हक और उनकी पूरी टीम पर शिवराज सरकार की एकतरफा कारवाई का मामला अब जबलपुर हाई कोर्ट पहुँच गया हैं.

कोर्ट ने इस मामलें में राज्य सरकार, गृह विभाग और पुलिस सहित छह को नोटिस जारी कर  एक हफ्ते में जवाब पेश करने को कहा हैं. डेमोक्रेटिक लॉयर फोरम की ओर से डायर की गई जनहित याचिकान में आरएसएस प्रचारक सुरेश यादव की कथित पिटाई को फर्जी बताया गया हैं. साथ ही याचिका में कहा गया कि राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस पर कार्रवाई की गई है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस मामले में सीबीआई जांच की भी मांग भी की है.

गौरतलब रहें कि RSS प्राचरक के खिलाफ कारवाई करने की वजह से अपनी पूरी टीम के साथ निलंबन का सामना कर रहें टीआई जिया उल हक़ और उनकी टीम पर हत्या, दंगा करवाने और लूटपाट करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया हैं. जिसके बाद सभी भूमिगत रहने को मजबूर हैं.

दरअसल 25 सितंबर को RSS के जिला प्रचारक सुरेश यादव  ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हुए पोस्ट की थी. जिसके बाद शहर का माहोल खराब हो गया था. मुस्लिम समुदाय की शिकायत के बाद एडिशनल एसपी राजेश शर्मा के नेतृत्व में सुरेश यादव की गिरफ्तारी की गई थी. गिरफ्तारी की बाद से ही जिया उल हक़ को उनके धर्म की वजह से निशाना बनाकर पुरे मामलें को साम्प्रदायिक बना दिया गया.


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