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ईद के मोके पर मौलाना राशिद अली फरंगीमहली ने आईएसआईएस को इस्लाम विरोधी करार देते कहा कि ऐसे संगठनों से जुडे लोगों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता.

ईद-उल-फितर की नमाज के बाद अपने ’खुतबे’ में मौलाना फरंगीमहली ने ढाका और मदीने में हुए आतंकवादी हमले की कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए कहा, ‘‘जिस व्यक्ति के अंदर इस्लाम से थोड़ी भी मोहब्बत होगी वह कभी भी रमजान जैसे पवित्र महीने में इस प्रकार के इस्लाम विरोधी कार्य को अंजाम नहीं दे सकता.

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उन्होंने कहा, ’’इस्लाम में मक्का व मदीना सबसे ज्यादा पवित्र स्थल हैं. कोई भी बुरा से बुरा मुसलमान भी इन स्थलों पर ऐसी घिनौनी हरकत नहीं कर सकता. इसलिए मदीने में हुए बम धमाके करने वाले मुसलमान नहीं हो सकते’’ मौलाना ने आईएसआईएस को इस्लाम विरोधी संगठन घोषित करते हुए संयुक्त राष्ट्र से उसके पीछे चल रहे षड़यंत्र को उजागर करने की अपील की.

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मौलाना फरंगीमहली ने यूनिफार्म सिविल कोड के मसले पर कहा कि यूनिफार्म सिविल कोड का मसला बार बार उठाना अवाम को बुनियादी मसलों से उनका जहन हटाने की एक साजिश है, क्योंकि हकीकत यह है कि हमारे देश हिन्दुस्तान में यूनिफार्म सिविल कोड जमीनी स्तर पर लागू किया ही नहीं जा सकता. मौलाना फरंगीमहली ने मुस्लिम पर्सलन लॉ की बुनियाद कुरान व हदीस को बताया ओर कहा इसमें किसी किस्म की तबदीली करना मुमकिन नहीं है.

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