लखनऊ : ‘12 दिन की कस्टडी में यूपी एसटीएफ ने रिमांड में 5 लोगों के साथ लिया और बराबर नौशाद और जलालुद्दीन के साथ टार्चर किया जा रहा था, जिसे देख हम दहशत में आ गए थे कि हमारी बारी आने पर हमारे साथ भी ऐसा ही किया जाएगा. टार्चर कुछ इस तरह था कि बिजली का झटका लगाना, उल्टे लटका कर नाक से पानी पिलाना, टांगे दोनों तरफ़ फैलाकर खड़ाकर डंडा से पीटना, नंगा कर पेट्रोल डालना, पेशाब पिलाना इन जैसे तमाम जिसके बारे में आदमी सोच भी नहीं सकता, हमारे साथ किया जाता था. 6 दिन तक लगातार एक भी मिनट सोने नहीं दिया.’

Azizur Rahman

यह बातें आज 8 साल 7 महीने लखनऊ जेल में रहने के बाद देशद्रोह के आरोप से दोषमुक्त हो चुके अजीर्जुरहमान ने रिहाई मंच द्वारा आयोजित लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान कहा.

24 परगना के बशीर हाट के रहने वाले 31 वर्षीय अजीर्जुरहमान ने बताया कि उसे 11 जून 2007 को सीआईडी वालों ने चोरी के इल्जाम में उठाया था. 16 जून को कोर्ट में पेश करने के बाद 22 जून को दोबारा कोर्ट में पेश कर 26 तक हिरासत में लिया. जबकि यूपी एसटीएफ ने मेरे ऊपर इल्जाम लगाया था कि मैं 22 जून को लखनऊ अपने साथियों के साथ आया था.

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अब आप ही बताएं की यह कैसे हो सकता है कि जब मैं 22 जून को कोलकाता पुलिस की हिरासत में था तो यहां कैसे उसी दिन कोई आतंकी घटना अंजाम देने के लिए आ सकता हूं?

खैर, हमारा रिमांड ख़त्म होने के एक दिन पहले लखनऊ से बाहर जहां ईट भट्टा और एक कोठरी नुमा खाली कमरा पड़ा था, वहां ले जाकर गाड़ी रोका और मीडिया के आने का इंतजार किया. यहां लाने से पहले एसटीएफ वालों ने हमसे कहा था कि मीडिया के सामने कुछ मत बोलना.

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इस बीच धीरेन्द्र नाम के एक पुलिसकर्मी ने सीमेंट की बोरी और फावड़ा लिया और कोठरी के अंदर गया फिर कोठरी के अंदर गड्डा खोदा, बोरी के अंदर से जो भी सामान ले गए थे, गड्डे के अंदर टोकरी में रख दिया. फिर जब सारे मीडिया वाले आ चुके तो हमको गाड़ी से निकालकर उस गड्डे के पास से एक चक्कर घुमाया जिसका फोटो मीडिया खींचती रही.

एसटीएफ वालों ने मीडिया को बताया कि ये आतंकी हैं जो कि यहां दो किलो आरडीएक्स, दस डिटोनेटर और दस हैंड ग्रेनेड छुपाकर भाग गए थे. इनकी निशानदेही पर यह बरामद किया गया है. मीडिया वाले बात करना चाह रहे थे पर एसटीएफ ने तुरंत हमें ढकेलकर गाड़ी में डाल दिया.

अजीजुर्रहमान ने बताया कि हम लोगों को जब यूपी लाया गया उस समय उसमें एक लड़का बांग्लादेशी भी था. पूछताछ के दौरान उसने बताया कि वह हिन्दू है और उसका नाम शिमूल है. उसके बाद दो कांस्टेबलों ने उसके कपड़े उतरवाकर देखा कि उसका खतना हुआ है कि नहीं. जब निश्चिंत हो गए की खतना नहीं हुआ है तो पुलिस वालों ने उससे कहा कि यह बात कोलकाता में क्यों नहीं बताया. उसके बाद दो कांस्टेबल उसे फिर से कोलकाता छोड़ आए. सिर्फ मुसलमान होने के नाते हमें आतंकी बताकर फंसा दिया गया.

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पत्रकार वार्ता के दौरान जेल में कैद आतंकवाद के अन्य आरोपियों के बारे में सवाल पूछने पर अजीजुर्रहमान ने बताया कि उनके साथ ही जेल में बंद नूर इस्लाम की आंख की रौशनी कम होती जा रही है. लेकिन मांग करने के बावजूद जेल प्रशासन उनका इलाज नहीं करा रहा है. साभार: twocircles.net


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