पूरा देश आज कारगिल युद्ध में शहीद जवानों के गम में डूबा हुआ है. ऐसे में देश की हिफाजत में जान देने वाले परिवारों का दर्द भी जानना ज़रूरी है. एक दर्द अपने प्रियजनों को खोने का दर्द है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती, तो वहीँ दूसरी और हमारी सरकारों द्वारा दिया गया दर्द है. जिसको लेकर वे केवल अपना गुस्सा ही जाहिर कर सकते है.

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दरअसल, देश के जवानों की शहादत पर नेता परिजनों को सांत्वना देने आते है. इस दौरान लंबे-लंबे भाषण देते है और इन्ही भाषणों में आश्वासन भी दिए जाते है जो कभी पुरे नहीं होते, इन आश्वासनों के भरोसे ये परिजन सरकारी विभागों के चक्कर लगाते रहते है.

कारगिल युद्ध में शहीद हुए पंजाब समाना के गांव धनेठा के लायंस नायक शीशा सिंह ने देश के लिए शहीदी दी थी. उस समय पंजाब सरकार और केंद्र सरकार ने इस फौजी की विधवा पत्नी को भरोसा दिया था कि तुम्हे गैस एजेंसी दी जाएगी, बच्चो की पढ़ाई मुफ्त करवाई जाएगी.

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लेकिन 18 साल बाद भी सरकार के अधिकारियो और फौजी अफसरों की बेरुखी की शिकार हुई शहीद फौजी की विधवा पत्नी की कही सुनवाई नहीं हो रही. बलवीर कौर ने बताया कि जब उसके पति शहीद हुए तो उसका एक बेटा गुरजीत सिंह पांच साल का था और दूसरा डेढ़ साल का मनजिंदर सिंह था जिसकी मुफ्त पढ़ाई की बात सरकार के अधिकारियों ने कही थी. लेकिन मेरे बच्चों को स्कूलों में मुफ्त शिक्षा नहीं मिली.

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