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भोपाल सेंट्रल जेल से कथित 8 सिमी कार्यकर्ताओं की फरारी और फिर एमपी पुलिस द्वारा कथित मुठभेड़ में उनकी हत्या को लेकर हाईकोर्ट में एक साथ 2 जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं. पहली याचिका कांग्रेसी नेता आरिफ मसूद की हैं वहीँ दूसरी वरिष्ठ पत्रकार अवधेश भार्गव की.

पत्रकार अवधेश भार्गव ने याचिका में सवाल उठाते हुए पूछा कि राज्य सरकार ये बताए की मेन गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे को जांच में शामिल क्यों नही किया जा रहा है. वहीँ आरोपियों के सेल में लगे सीसीटीवी कैमरे खराब क्यों थे ? इसके अलावा आरोपी जो दिवार कूद कर भागे थे वहां 35 चादरें मिली हैं. जेल मेनुअल के अनुसार किसी भी कैदी को दो से ज्यादा चादर नहीं दी जाती है तो इनके पास 35 चादरें कहां से आई?

उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले में जेल प्रशासन और पुलिस प्रशासन मिला हुआ था. यह पूरी तरह से प्लानिंग के तहत किया गया एनकाउंटर है. भार्गव द्वारा हाईकोर्ट मे दायर याचिका क्रमांक 10805/16 की सुनवाई सोमवार को की जानी है.

वहीँ कांग्रेस नेता आरिफ अकील ने इसे सरकार को फेल्युअर बताते हुए लब्रेक और एनकाउंटर की जांच हाईकोर्ट के सीटिंग जज से कराने की मांग की है. कैसे इतने आंतकी जेल से भाग गए? जेल से भागने की पहले हुई घटनाओं से सबक क्यों नहीं लिया है?


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