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आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आबिद रसलू खान ने तीन तलाक के मसले पर एक साथ तीन तलाक दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इस बारें में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अपने रूख में बदलाव करना चाहिए.

इसे मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी सामजिक समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में लाखों ऐसी औरते हैं जो सिर्फ इसलिए मुश्किल हालात का सामना कर रही हैं कि उनके पतियों ने तीन बार तलाक कहकर उन्हें अलग कर दिया. इस बारें में उन्होंनेपर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को भी पत्र लिखा.

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पत्र में उन्होंने कहा कि ”मैं आपको सावधान करना चाहता हूं कि अगर आपने एक साथ तीन तलाक पर जोर दिया तो आप हमारी लाखों बहनों के साथ नाइंसाफी करेंगे तथा उच्चतम न्यायालय के लिए दरवाजा खोलेंगे कि वह इस कानून को रद्द कर दे क्योंकि इसे मानवाधिकार के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है”

उन्होंने दोनों संस्थाओं को नसीहत देते हुए कहा कि , यह मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि यह और इतना आगे बढ़ सकता है कि हमारे पर्सनल लॉ को अमान्य करार दिया जाए और समान आचार संहिता लागू कर दिया जाए. उन्होंने आगे कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन उन धार्मिक कानूनों को रद्द कर दिया जाता है जहां अदालतें मानवाधिकार का उल्लंघन पाती हैं.

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