abidrasoolkhan-e1467708277643

आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आबिद रसलू खान ने तीन तलाक के मसले पर एक साथ तीन तलाक दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इस बारें में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अपने रूख में बदलाव करना चाहिए.

इसे मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी सामजिक समस्या बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरे देश में लाखों ऐसी औरते हैं जो सिर्फ इसलिए मुश्किल हालात का सामना कर रही हैं कि उनके पतियों ने तीन बार तलाक कहकर उन्हें अलग कर दिया. इस बारें में उन्होंनेपर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को भी पत्र लिखा.

और पढ़े -   केरल में दो नाबालिग लड़कों से यौन उत्पीड़न के मामले में चर्च का पादरी गिरफ्तार

पत्र में उन्होंने कहा कि ”मैं आपको सावधान करना चाहता हूं कि अगर आपने एक साथ तीन तलाक पर जोर दिया तो आप हमारी लाखों बहनों के साथ नाइंसाफी करेंगे तथा उच्चतम न्यायालय के लिए दरवाजा खोलेंगे कि वह इस कानून को रद्द कर दे क्योंकि इसे मानवाधिकार के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है”

उन्होंने दोनों संस्थाओं को नसीहत देते हुए कहा कि , यह मुद्दा इतना बड़ा हो चुका है कि यह और इतना आगे बढ़ सकता है कि हमारे पर्सनल लॉ को अमान्य करार दिया जाए और समान आचार संहिता लागू कर दिया जाए. उन्होंने आगे कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन उन धार्मिक कानूनों को रद्द कर दिया जाता है जहां अदालतें मानवाधिकार का उल्लंघन पाती हैं.

और पढ़े -   बाल तस्करी मामला: बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय और रूपा गांगुली को नोटिस

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE