कश्मीर: सैयद अली शाह गिलानी की अगुवाई वाला हुर्रियत कॉन्फ्रेंस भी अब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में कूद गया है। हुर्रियत के इस धड़े ने इन स्टूडेंट्स के समर्थन में 27 फरवरी को पूरे कश्मीर, चेनाब घाटी और पीर पंजाल रीजन में बंद का आह्वान किया है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने JNU छात्रों के खिलाफ कार्रवाई, कश्मीरी स्टूडेंट्स को परेशान किए जाने और एस. ए. आर. गिलानी के खिलाफ देशद्रोह के आरोप लगाए जाने का ‘फासीवाद और सरकारी आतंकवादी का घिनौना रूप’ बताया है।

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के जनरल सेक्रटरी शब्बीर शाह ने कहा, ‘भारत में कुलीन ब्राह्मणों शासन चला रहे हैं और वे हर अल्पसंख्यक और पिछड़ी जाति के लोगों को आवाज को दबाने की कोशिश करते हैं।’ अलगाववादी संगठन ने JNU के छात्रों पर कार्रवाई के खिलाफ 26 फरवरी यानी शुक्रवार को भी नमाज के बाद विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है।

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शाह ने कहा, ‘डर और परेशानी के कारण कई कश्मीरी स्टूडेंट्स वापस आ रहे हैं। हम कन्हैया कुमार, उमर खालिद और कई अन्य के लिए अपना समर्थन जाहिर करते हैं, जिन्होंने उस फासीवादी मीडिया का पर्दाफाश किया, जिसने उन्हें फंसाने की कोशिश की।’

हुर्रियत के मुताबिक, JNU के स्कॉलर्स ने कश्मीर के पक्ष में आवाज बुलंद करते हुए ‘सच और वास्तविकता’ का पक्ष लिया और भारत सरकार ताकत से इन स्कॉलर्स को चुप कराना चाहती है। शाह ने एस. ए. आर. गिलानी की गिरफ्तारी को भी राजनीति से प्रेरित बताया।

उन्होंने कहा, ‘अगर एस ए आर गिलानी और बाकी स्टूडेंट्स को तुरंत परेशान करना बंद नहीं किया जाता है और उनकी रिहाई नहीं होती है, तो इस पर कश्मीर में तीखी प्रतिक्रिया होगी।’ (नवभारत टाइम्स)


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