छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली है. इस महीने में सीआरपीएफ के तीन जवानों ने आत्महत्या की है.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले के दोरनापाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत पेंटा गांव में स्थित सीआरपीएफ के 150 वीं बटालियन के शिविर में आरक्षक दिवाकर राव (37) ने अपने सर्विस रायफल से अपने बैरक में खुद को गोली मार ली. साथी जवानो ने खून से लथपथ दिवाकर को दोरनापाल शिविर पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई.

दिवाकर आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले का निवासी था. दिवाकर के आत्महत्या के कारणों के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है.  इससे पहले 9 मई को बीजापुर के जांगला में पदस्थ सीआरपीएफ के जवान सुखविंदर सिंह ने आत्महत्या कर ली थी. अब तक उनकी आत्महत्या के कारणों का भी पता नहीं चल पाया है.

सरकारी आकड़ों के अनुसार 2015 के अंत तक पांच साल में नक्सली इलाकों में सीआरपीएफ के 870 जवान तनाव के कारण मारे गये हैं. इसकी तुलना में नक्सलियों द्वारा मारे गये सीआरपीएफ के जवानों की संख्या 323 है.

वहीँ 2009 के जनवरी माह से 2013 के दिसंबर माह तक नक्सली इलाकों में तैनात सीआरपीएफ के 642 जवान हृदयाघात से मारे गये तथा 228 ने अवसाद के कारण आत्महत्या कर ली. इसी अवधि में मलेरिया से मरने वाले जवानों की संख्या 108 है.

सरकारी आकड़ों के अनुसार सीएपीएफ में सबसे ज्यादा आत्महत्या सीआरपीएफ के जवान करते हैं. पिछले चार सालों में पूरे देश में सीआरपीएफ में 137 आत्महत्या, आईटीबीपी में 12 आत्महत्या, एसएसबी में 26 आत्महत्या, सीआईएसएफ में 50 आत्महत्या और एआर में 32 आत्महत्या के मामले सामने आये हैं.


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