रामपुर : नफ़रत को कभी नफ़रत से नहीं हटाया जा सकता. हज़रत महबूब-ए-इलाही ने कहा है कि ‘यदि राह में कांटे बिछाने वालों को कांटे बिछाकर जवाब दिया जाए तो पूरी दुनिया कांटों से भर जाएगी.’

Ashraf Kichauchwi

हज़रत बाबा फरीदगंज शकर को किसी ने कैंची दी तो आपने कहा कि मुझे कैंची नहीं, सुई चाहिए क्योंकि मेरा काम काटने का नहीं, बल्कि जोड़ने का है. यही कारण है कि सूफिया के पास बिना धर्म व जाति के भेदभाव के लोग आते रहे हैं और निर्देश पाते रहे और आज भी हर धर्म और समुदाय के लोग उनके आस्ताने पर पहुंचकर लाभान्वित हो रहे हैं.

इन विचारों को सैफनी, रामपुर में आयोजित जश्न-ए-ग़ौसुलवरा में ‘ऑल इंडिया उलेमा व मशाईख बोर्ड’ के संस्थापक और अध्यक्ष सैय्यद मोहम्मद अशरफ़ किछौछवी ने व्यक्त किया.

लोगों में फैली ग़लतफ़हमी को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि –‘ऐसा नहीं है कि सूफी आलिम नहीं होता, क्योंकि अल्लाह किसी जाहिल को दोस्त नहीं रखता. हर सूफी आलिम व फ़क़ीह होता है. यह अलग बात है कि फ़कीरी उसकी इल्मी शोहरत पर पर हावी हो जाती है. वालियों के इमाम हज़रत गौसे आज़म ने जहां एक तरफ़ तरीक़त व मारेफ़त के जौहर बिखेरे, वहीं दूसरी ओर इल्म और फ़िक़ह से भी लोगों को फैज़ पहुँचाया.

हज़रत मौलाना ने कहा कि –‘कल भी सूफिया ने इल्मी और रूहानी प्यास बुझाई है और आज भी जब दुनिया वैश्विक संकट का शिकार नज़र आ रही है तो तसव्वुफ़ का रास्ता खोजा जा रहा है.’

उन्होंने घोषणा की कि –‘वैश्विक संकट के समाधान की खोज में दुनिया भर के उलेमा, मशाईख और दानिश्वर 20 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में इकट्ठा होकर वैश्विक संकट के समाधान की खोज भी करेंगे और सार्वजनिक बैठक में इसकी घोषणा भी करेंगे.’ (twocircles)


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