“बिहार में तीन करोड़ रुपए का सौर ऊर्जा घोटाला सामने आया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आधिकारिक आवास और उनके जनता दरबार समेत अन्य सरकारी दफ्तरों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और लाइटें लगाने का प्रस्ताव 2011 में केन्द्र सरकार ने दिया था। बिहार सरकार के `बिहार रीन्यूवेबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी’ (ब्रेडा) ने अनुमानित लागत से ज्यादा पर सौर ऊर्जा का प्लांट और अन्य उपकरण लगवाए। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने भी इस प्रोजेक्ट की लागत पर उंगली उठाई।”
वेबसाइट `कोबरापोस्ट’ ने आरटीआई एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय और केन्द्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) से मिले दस्तावेजों के हवाले से दावा किया है कि ब्रेडा ने तीन करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की लागत 4.50 करोड़ रुपए कर दी। इसे लार्सन एंड टुब्रो कंपनी को सौंपा गया, जिसने टेंडर में सबसे ज्यादा रकम पांच करोड़ 14 लाख 22 हजार रुपए भरी थी। कम रकम भरने वाली लेंको और मोसेर बीयर को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया।

इस परियोजना के लिए आधी रकम राज्य सरकार को और आधी केन्द्र को लगानी थी। अप्रैल 2013 में सीएजी की ऑडिट में कहा कि परियोजना में 10 महीने की बेकार की देरी की गई। ब्रेडा को 1.5 करोड़ रुपए अतिरिक्त लगाने के पहले केन्द्रीय एजेंसी से पूछना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और हड़बड़ी में काम कराया गया। इस काम के लिए कंपनियों को चुनने में भी अनियमितता बरती गई। (outlookhindi.com)


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