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मथुरा: यमुना एक्सप्रेस वे पर मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के फाफिले के साथ हुई सड़क दुर्घटना के बाद ईरानी ने ट्वीट कर अपनी सलामती की खबर दी थी। साथ ही कहा था कि दुर्घटना की वजह से कई गाडि़यां आपस में भिड़ गईं। दुर्भाग्य से मेरी कार और मुझसे आगे चल रही पुलिस की जिप्सी भी टकरा गईं। सड़क पर पड़े घायलों की मदद करने की कोशिश की गई और उन्हें अस्पताल ले जाना सुनिश्चित किया है। उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना है। लेकिन दुर्घटना के बाद मारे गए डॉ. आरके नागर के बेटे अभिषेक नागर का दावा इसके ठीक उलट है। उनका कहना है कि ईरानी ने पीडि़तों को नजरअंदाज किया और आगे अपने सफर पर निकल गईं। वह तो बाद में पुलिस बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंची। वहीं, पीडि़त की घायल बेटी संदिली नागर ने भी स्मृति ईरानी पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। संदिली नागर ने कहा, ”मैंने हाथ जोड़कर स्मृति ईरानी से मदद मांगी, लेकिन वह मेरे पापा को सड़क पर तड़पते हुए छोड़ गाड़ी में बैठकर भाग निकलीं। यदि पापा को समय पर हॉस्पिटल पहुंचाया जाता तो वह जिंदा होते। दो घंटे बाद दिल्ली के एक परिवार ने एंबुलेंस बुलाई।”

डॉ.नागर के बेटेे अभिषेक ने मांट थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके अनुसार स्मृति ईरानी के काफिले की गाड़ी से एक्सीडेंट हुआ था, लेकिन मंत्री ने कोई मदद नहीं की और गाड़ी में बैठकर निकल गईं। ईरानी पर पीडि़त परिवार के आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। कांग्रेस और एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी की गाड़ी ने आगरा निवासी रमेश नागर को कुचल दिया। घटना के विरोध में रविवार को मथुरा लोकसभा क्षेत्र के युवा कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। रमेश नागर के परिजनों के साथ मथुरा पोस्टमार्टम हाउस पर जाम लगाया और स्मृति के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की।

गौरतलब है कि शनिवार की शाम एचआरडी मंत्री स्मृति ईरानी वृंदावन में भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रही थीं। मथुरा के मांट पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक घटना के बाद ड्राइवर फरार हो गया। एफआईआर के मुताबिक, मंत्री के काफिले में शामिल तेज गति से चल रही डीएल 3सी बीए 5315 नंबर की कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी, जिसमें रमेश और दो बच्चे सवार थे। तीनों एक शादी में जा रहे थे। आरोप है कि नागर के आठ वर्षीय भतीेज पंकज को मथुरा के जिला अस्पताल में प्राथमिक चिकित्सा भी नहीं दी गई।

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