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इस्लाम के नाम पर अपने स्वार्थ के लिए दुनिया भर में मानवता को शर्मसार करने वालें आतंकी बच्चों के हाथों में हथियार थमा कर जान लेना सिखा रहें हैं. वहीँ हरियाणा के इस छोटे से गाँव के मदरसें में ‘आतंकवाद’ के खिलाफ इस्लामिक तालीम को हथियार बनाया गया हैं. इसी हथियार की बदोलत छोटे-छोटे बच्चों को दहशतगर्दी से दूर रहने का पाठ सिखाया जा रहा है.

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गुरुग्राम के चौमा स्थित इस मदरसे में मुस्लिम अल्पसंख्यक ट्रस्ट व जमी-ए-तुला हिंद के आर्गेनाइजर के सदस्य पिछले कई सालों से दहशतगर्दी से दूर रहने की तालम दे रहे हैं. यही नहीं ये लोग गुरुग्राम के विभिन्न मदरसों में जाकर छोटे बच्चों को शांती बहाली व अमन के पैगाम का पाठ पढ़ा रहे हैं। साथ ही दे रहे हैं.

‘दहशतगर्दी की मजम्मत’ के इस संदेश में हिंसा की कोई जगह नहीं हैं. इस तालीम का मकसद आने वाली पीढ़ी को यह बताना हैं कि इस्लाम में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है, बल्कि दहशतगर्दी करने वालों को मुसलमान नहीं कहा जा सकता.

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