देश में हिंदू-मुस्लिमों के बीच धर्म की दीवार खड़ी कर उन्हें एक-दुसरे के खून का प्यासा बनाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन दोनों और के लोगों के बीच की मोहब्बत इन नापाक मंसूबो को कामयाब नहीं होने देती है.

हाल ही में 5 मई को अमरोहा की विकास कालोनी में रहने वाले एलआईसी एजेंट कृष्ण बल्लभ गोयल का ब्रेन ट्यूमर होने के कारण निधन हो गया था. उनकी इकलौती बेटी निकेता ने ही उनका अंतिम संस्कार किया था. वे यहां किराए के मकान में पत्नी गीता व इकलौती बेटी निकिता के साथ रहते थे. घर की माली हालत ठीक न होने के कारण पत्नी गीता भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं.

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ऐसे में अब गोयल की मौत के बाद पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार और ज्यादा संकट में घिर गया. निकिता ने इसी वर्ष बारहवीं की परीक्षा पास की है. वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहती है. परंतु पिता की मौत के बाद निकिता को अपना सपना बिखर गया.

लेकिन इसी बीच हाशमी एजूकेशनल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सिराजुद्दीन हाशमी को इस बारे में जानकारी मिली तो सोमवार को वह निकिता के घर पहुंच गये. इस दौरान उन्होंने निकिता के डॉक्टर बनने की राह में आर्थिक रोड़ा की बात सामने आने पर उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च खुद उठाने का वादा किया. इसके अलावा उन्होंने घर का खर्च सुचारु रूप से चलते रहने के लिए निकिता की मां गीता गोयल को अपने कालेज हाशमी ग‌र्ल्स इंटर कालेज में बतौर शिक्षिका नौकरी देने का एलान किया.

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निकिता से कहा कि बेटी तुम मन लगाकर पढ़ो, मैं बनाऊंगा तुम्हे डाक्टर. इतना ही तात्कालिक मदद के रूप में चेक भी सौंपा.


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