पश्चिमी बंगाल में मदरसा छात्रों को राष्ट्रगान सिखाने वाले शिक्षक की पिटाई किए जाने पर देवबंदी उलेमा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि राष्ट्रगान का अभ्यास कराना कोई जुर्म नहीं है। शिक्षक के साथ जो कुछ हुआ वह निंदनीय है।

दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि� कोलकाता के मटियाबुर्ज इलाके में स्थित तालपुकुर आरा मदरसे के हेडमास्टर काजी मासूम अख्तर को छात्रों को राष्ट्रगान सिखाने के चलते मारपीट कर मदरसे से बाहर निकाले जाने के मामले की निंदा की है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान गाना या उसका अभ्यास कराना कोई जुर्म नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां तक इस्लामिक पहनावे का मामला है, तो प्रतीत होता है कि उसी के कारण शिक्षक पर इस तरह का झूठा इल्जाम लगाकर उन्हें बाहर निकाला गया है, जो सरासर निंदनीय है।

मदरसा अल जामिया तुल अनवरिया के मोहतमिम मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने भी शिक्षक काजी मासूम अख्तर के साथ मारपीट करने को गलत बताते हुए कहा कि उनके साथ ज्यादती हुई है।

मारपीट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान सभी मदरसों में गाया और सिखाया जाता है इससे किसी को कोई ऐतराज नहीं है। यदि सिर्फ इसी मामले को लेकर मारपीट की गई है तो यह शिक्षक के साथ ज्यादती है


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