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भोपाल: दिवाली की रात कथित तौर पर सिमी सदस्यों के जेल तोड़कर फरार होने और फिर शहर से 10 किमी दूर कथित पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने को लेकर जेल प्रबंधन द्वारा एनकाउंटर की सुचना नौ दिन बाद बुधवार को जिला अदालत को दी गई.

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भूभास्कर यादव ने 9 दिन बाद अदालत को सूचना देने पर जेल प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इसकी विधिवत सूचना दी, जबकि नियमानुसार पुलिस को तुरंत ही इसकी सूचना देनी थी. उन्होंने ने पूछा मौत की सूचना तुरंत क्यों नहीं दी गई.

सीजेएम ने सवाल उठाते हुए पूछा कि किस तारीख पर ये लोग मारे गए? क्या जांच हेतु न्यायिक मजिस्ट्रेट को सूचना दी गई? मृत बंदियों के पोस्टमार्टम से पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट को सूचना दी गई? इतने अहम विषय पर कोई जानकारी आज तक कोर्ट को क्यों नहीं दी गई?

सीजेएम भू भास्कर यादव ने आर्डर शीट में लिखा कि जिन व्यक्तियों के मारे जाने की सूचना बुधवार को अदालत को दी जा रही है, वे न्यायिक अभिरक्षा में थे. मीडिया के सामने सरकार और पुलिस अफसरों ने कथित आतंकियों को मारने के नाम पर कई बार अपने इंटरव्यू दिए. लेकिन जिस अदालत की हिरासत में बंदियों को जेल में रखा गया था, उन्हें समय पर सूचना भी नहीं दी गई. यदि सरकार बंदियों के भागने की जांच करा रही है, तो इसका अर्थ यही है कि सरकार भी किसी विनिश्चय पर नहीं पहुंची है. इतने में जेल के किसी कर्मचारी की सूचना मात्र पर अदालत कैसे विश्वास कर ले कि बंदी जेल से भाग गए थे. नौ दिन बाद पहली बार कोर्ट को अधिकारिक रूप से यह सूचित किया जा रहा है कि बंदियों का एनकाउंटर हो गया. मामला बेहद गंभीर है.

वहीँ सिमी सदस्यों के वकील ने कोर्ट में अर्जी पेश कर कहा था कि पुलिस ने आठ बंदियों को फर्जी एनकाउंटर में मार दिया है. वकील ने यह भी आरोप लगाया था कि जेल में इस मामले में बंद अन्य आरोपी युवकों को जेल प्रशासन प्रताड़ित कर रहा है. वकील ने मजिस्ट्रेट के साथ बंदियों से जेल में मुलाकात के लिए वक्त दिए जाने का अनुरोध किया था. सीजेएम ने लिखा बंदियों से जेल में मुलाकात का प्रावधान नहीं होने से सिर्फ वकील को मुलाकात करने के लिए मात्र 20 मिनट की मंजूरी दी है.


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