सिख समुदाय ने सोमवार को जंतर-मंतर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर का पुतला फूंका।

सिख समुदाय ने सोमवार को जंतर-मंतर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर का पुतला फूंका। बीते दिनों दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन के जरिए केजरीवाल और टाइटलर की कथित मुलाकात करवाने का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद से सिख समुदाय नाराज है।

1984 के सिख दंगों के पीड़ित परिवारों ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके की अगुआई में गुरुद्वारा बंगला साहिब से जंतर-मंतर तक इंसाफ मार्च निकाला। उन्होंने इस कथित मुलाकात में शामिल तीनों नेताओं की भूमिका की जांच सीबीआइ से कराने की मांग भी की। इसके साथ ही सोमवार को कड़कड़दूमा अदालत में टाइटलर के केस की सुनवाई होने के कारण कोर्ट परिसर के बाहर भी अकाली दल के पूर्व विधायक जतिंदर सिंह शंटी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया।

जीके ने सवाल किया कि हर मसले पर ट्वीट करने वाले और पंजाब में जाकर सिखों के साथ हमदर्दी का ढोंग करने वाले केजरीवाल इस मुलाकात पर चुप क्यों हैं। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात के बाद दिल्ली सरकार की ओर से सिख दंगों के लिए बनाई गई एसआइटी की फाइल गुम हो गई है। टाइटलर के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे केजरीवाल के पत्र को भी जीके ने सिखों की आंखों में धूल झोंकने का अंतिम प्रयास बताया।

जीके ने कहा कि 14 जनवरी को पंजाब के मुक्तसर में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का ताऊ बताते हुए उनसे नहीं डरने का दावा किया था, तो आज ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखना पड़ा। जीके ने साफ किया कि केजरीवाल अब प्रधानमंत्री से टाइटलर की गिरफ्तारी की मांग इसलिए कर रहे हैं ताकि वे किसी भी तरीके से टाइटलर के साथ अपनी मुलाकात की बात को दबा सकें, लेकिन अकाली दल उन्हें किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने देगा। (Jansatta)


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