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सोमवार को दो याचिकाकर्ताओं द्वारा राज्य में पुलिस ज्यादतियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाये जाने से नाराज सुरक्षा कर्मियों ने याचिकाकर्ताओं सहित सामजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के पुतले जलाए. आमतौर पर नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस तरह के कार्यों को अंजाम दिया जाता हैं.

लेकिन पहली बार कथित मानवाधिकार हनन को लेकर छत्तीसगढ़ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई को सात पूर्व विशेष पुलिस बल अधिकारियों (एसपीओ) के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल करने के आदेश के दो दिन बाद पुलिस ने ये कारवाई की.

11 से 16 मार्च 2011 के बीच आर्म्ड औक्सिलिअरी फोर्सेज ने आदिवासी गाँव तारमेटला पर हमला कर आग के हवाले कर दिया था. इसके अलावा पूर्व 26 सलवा जुडूम कार्यकर्ताओं ने  26 मार्च, 2011 को सामजिक कार्यकर्ता  स्वामी अग्निवेश पर हमला उस वक्त कर दिया था. जब वे इस घटना के बारे में जानने के लिए गाँव जा रहे थे.

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पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज S.R.P. कल्लूरी ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया था कि आदिवासियों के घरों में अत्यधिक गर्मी की वजह से आग लग थी. इसके अलावा उन्होंने याचिकाकर्ताओं के बारे में आक्रामक टिप्पणी की थी.

सोमवार दोपहर को बस्तर रेंज हथियारों से लैस सहायक बलों के कर्मियों ने एक समन्वित अभियान के तहत कम्युनिस्ट पार्टी के नेता मनीष कुंजम और दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर नंदनी सुन्दर के पुतले जलाये. इन दोनों ने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की हैं.

इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार और बेला भाटिया, आम आदमी पार्टी के नेता सोनी सोरी और पत्रकार मालिनी सुब्रमण्यम, जो जगदलपुर में स्क्रॉल के लिए संवाददाता थे जिन्हें बस्तर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था का भी पुतला जलाया गया.


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