भोपाल। राज्य के इंजीनियरिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों में व्यापमं से बड़ा स्कॉलरशिप घोटाला हुआ है। यदि पांच साल में दी गई स्कॉलरशिप की जांच हो तो यह घोटाला करोड़ों में पहुंच सकता है। विधानसभा में गुरुवार को पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मप्र में 20 प्रतिशत फर्जी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप राशि का भुगतान किया गया है।
कैग ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित 15 जिलों में 540 कॉलेजों में सैंपल जांच में पाया कि पांच साल में 5441 विद्यार्थियों ने फर्जी तरीके से एक साल में दो बार स्कॉलरशिप ली है। कितनी राशि का घोटाला हुआ है, इसका अनुमान लगाना फिलहाल मुश्किल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान राशि स्वीकृति के दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण वास्तविक भुगतान को प्रमाणित नहीं किया जा सकता है।
कई जिलों के दस्तावेज खंगाले 
केंद्र और राज्य सरकार योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप देती है। वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक ऐसे 15 लाख 97 हजार विद्यार्थियों को 1586 करोड़ 43 लाख रुपए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप बांटी गई। कैग ने दिसंबर 14 से जुलाई 15 के बीच 15 जिलों के दस्तावेजों की सेंपल जांच की। इसमें चारों महानगरों के अलावा देवास, मंडला, पन्ना, सागर, खरगौन, सीहोर, उज्जैन, धार, झाबुआ, भिंड और मुरैना जिलों में दस्तावेज खंगाले गए।
बिना दस्तावेजों के दे दी स्वीकृति 
14 जिलों के 2600 आवेदनों की सैंपल जांच में पाया गया कि जाति, आय प्रमाण पत्र और पिछले कॉलेज की टीसी के दस्तावेजों के बिना ही स्कॉलरशिप स्वीकृत कर दी गई है। (bhopalsamachar)

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