लखनऊ – बहराइच में जहाँ देवबंदी बरेलवी टकराव का नया मामला सामने आया है वही इस मामले से सोशल मीडिया से लेकर मुस्लिम समुदाय तक को सकते में डाल दिया है. आग की तरह फैली इस खबर की सच्चाई जानने के लिए कोहराम न्यूज़ तुरंत सक्रीय हो गया तथा अपने पाठकों को सच से रूबरू कराने के लिए खुद उस महिला के बेटे से बात की जिसका देहांत हो गया था.

कोहराम के संवादाता ने मृतक महिला के बेटे पीर अली मिस्त्री से बात करके मामले को साफ़ कर दिया है! कोहराम न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने बताया की ‘जब हम अपनी अम्मी के जनाज़े को लेकर कब्रिस्तान में गए तो वहां पहले से मौजूद देवबंद समाज के हाफिज मुईद और उनके साथियों ने हमे रोका और कहा की हमारी शर्ते मानोगे तो ही तुम्हे दफ़नाने दिया जायेगा नहीं तो आप जनाज़े को वापस ले जा सकते हो!’

उन्होंने एक कागज़ पर कई शर्ते जिनमे देवबंदी इमाम से दुबारा जनाज़े की नमाज़ पढवाने और दुरूद फातिहा नहीं करने की थी ! जनाज़े की नमाज़ हम पढ़वा चुके थे और इनमे से कोई शर्त हम मानने को तैयार नहीं हुए तो वह लोग नाराज़ हो गए और जनाज़े को दफ़नाने नहीं दिया ! हम लोग वापस जनाज़े को लेकर  आ गये और अपनी वालिदा को हम ने कटरा कब्रिस्तान में दफनाया! इस बात की पुष्टि मैं करता हूँ और कहीं भी गवाही देने को तैयार हूँ ! साथ ही वहां मौजूद मौलाना ज़किउल्लाह साहब मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन ने बताया कि जनाब निजामुद्दीन की पत्नी का इन्तेकाल हुआ था और जनाज़े की नमाज़ कारी महबूब साहब ने पढाई थी जोकि उनके परिवार के खास थे!

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देवबंद समाज के लोगों ने इनके जनाज़े की नमाज़ पढवाने पर ऐतराज़ किया और तब बरेलवी वर्ग से उनके परिवार ने जवाब दिया कि जनाज़े की नमाज़ के लिए मरहूम की यही इच्छा थी इसलिए ऐसा किया! इस पर देवबंदी समाज के लोगों जिनमे हाफिज मुईद समेत अन्य ने कहा की यह कब्रिस्तान वहाबी देवबंदी वर्ग का है इसमें दफ़नाने की कुछ शर्ते हैं जो आप सब को माननी होंगी! आप वह मानने को तैयार नहीं हैं इसलिए आप यहाँ नहीं दफना सकते हैं ! आप जनाज़ा वापस ले जाएये मरहूमा यहाँ दफन नहीं की जा सकती हैं! इस मौके पर यह लोग लडाई पर उतारू हो गए और मजबूरन जनाज़ा वापस ले जाना पड़ा !

इस के बाद जनाज़े को तकिया मस्जिद वाले कब्रिस्तान में दफन किया गया ! यहाँ यह बात काबिले गौर है किइलाके में इस घटना से पहले किसी भी कब्रिस्तान में दफन की पूरी इजाज़त थी मरहूमा के बेटे से बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग कोहराम न्यूज़ के पास है! इसके साथ बरेली से इस घटना की सच्चाई परखने गए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए अफ़सोस जताया है!
उन्होंने घटना स्थल का दौरा कर मकामी लोगों से बातचीत की और कोहराम न्यूज़ को बताया की उक्त घटना बेहद गलत है और सिर्फ मसलक की बुनियाद पर खुदी हुई कब्र में मरहूमा को दफन नहीं होने दिया गया!

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Courtesy- The Times Headline


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